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Dholpur: वन भूमि से वन संपदा गायब और अब मिट्टी पर भी संकट

dholpur, राजाखेड़ा तहसील क्षेत्र के उत्तनगन नदी तटवर्ती मात्र दो गांवो डिडवार एवं श्रीपाल की गढ़ी में विशाल वन भूमि पर कथित अतिक्रमण, अवैध खनन और पेड़ों की कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने युवा धर्मेंद्र के नेतृत्व में धोलपुर पहुंच कर संभागीय वन अधिकारी को लिखित शिकायत देकर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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dholpur, राजाखेड़ा तहसील क्षेत्र के उत्तनगन नदी तटवर्ती मात्र दो गांवो डिडवार एवं श्रीपाल की गढ़ी में विशाल वन भूमि पर कथित अतिक्रमण, अवैध खनन और पेड़ों की कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने युवा धर्मेंद्र के नेतृत्व में धोलपुर पहुंच कर संभागीय वन अधिकारी को लिखित शिकायत देकर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वे पूर्व में भी इस मुद्दे पर प्रशासनिक अधिकारियों को भी कई बार शिकायत दे चुके हैं, लेकिन स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से कोई कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी। ग्रमीणों ने संभागीय वन अधिकारी को बताया कि ग्राम डिडवार स्थित वन भूमि खाता संख्या 228 में दर्ज लगभग 194.6786 हेक्टेयर (करीब 1600 कच्चे बीघा) क्षेत्र पर प्रभावशाली लोगों ने दशकों पूर्व से अतिक्रमण कर लिया है। आरोप है कि इस वन भूमि से बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन कर भूमि को कृषि योग्य बनाया गया तथा वहां फसलें बोई जा रही हैं। इतना ही नहीं, वन क्षेत्र में मौजूद पेड़-पौधों की कटाई कर लकड़ी को ईंट भट्टों एवं आरा मशीनों पर बेचा जा चुका है इक्का दक्का छोटे पेड़ और घास ही शेष बची है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन भूमि पर लगातार नए मकानों का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे वन क्षेत्र का स्वरूप तेजी से समाप्त होता जा रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि तहसील के ही ग्राम श्रीपाल की गढ़ी स्थित वन भूमि, खाता संख्या 28, रकबा लगभग 550 कच्चे बीघा, पर भी अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा रखा है।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

शिकायत सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि हजारों बीघा वन भूमि पर कथित अतिक्रमण, पेड़ों की कटाई और निर्माण गतिविधियां जब लंबे समय से चल रही हैं तो संबंधित विभागों के स्थानीय अधिकारियों और बड़े अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं है। या जानकर भी अनदेखा किन कारणों से किया गया है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की हरित संपदा को क्षति पहुंच सकती है। जिसका पुनर्भरण संभव नहीं होगा। मांग की है कि दोनों गांवों की वन भूमि का तत्काल सीमांकन कराकर अतिक्रमण हटाया जाए, अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएं तारबंदी कराकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के विरुद्ध वन अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनों में कार्रवाई की जाए।