
धौलपुर स्थाना दिवस
-धवलपुरी से धौलपुर और उसके जिला बनने की कहानी संघर्षों से भरी
-जिला बनाने जेल भरो आंदोलन से लेकर लोगों ने किए थे अनशन- 44 सालों में जिम्मेदारों ने धौलपुर को हंसाया भी तो रुला भी रहे खूब
धौलपुर. हमारा धवलपुरी...यानी धौलपुर जिला आज 44 साल का हो गया। जिसे धौलपुरवासियों ने लाख जतन कर पाया था। कभी बागी और बंदूक की गडगड़़ाहट की गूंज से गुंजायमान रहने वाला राजस्थान का यह पूर्वी जिला आज खुलकर सांसें जरूर ले रहा है, लेकिन अपनों और जिम्मेदारों की बेरुखी से कराहते हुए अपने सुनहरे भविष्य को गढऩे लालायतित है।
धवलपुरी से..धौलपुर और धौलपुर के जिला बनने की इसकी यात्रा को देखें तो इसमें राजशाही, संघर्ष, त्याग, बलिदान और उसके बाद सफलता की तस्वीर दिखाई देती है। इतिहासकार बताते हैं कि धौलनदेव नाम के राजा ने धौलपुर को बसाया था। धौलपुर के राजस्थान में शामिल होने से पूर्व यहां रियासत हुआ करती थी, यहां के अपने शासक थे। आजादी के बाद धौलपुर को अलग जिला ना बनाते हुए भरतपुर जिला में शामिल किया गया। लोगों का मानना था कि यहां का विकास तभी संभव है जब धौलपुर जिला घोषित हो। जिसके बाद से ही धौलपुर को जिला बनाने की मांग जोर पकड़ती गई। जिला बनाने की मांग धीरे-धीरे सुलगती रही और आंदोलन का रूप ले लिया। आंदोलन ने जोर पकड़ा और जिला बनाने की मांग को लेकर 1960 में सोशलिस्ट पार्टी ने जेल भरो आंदोलन किया। आंदोलन में करीब दो दर्जन लोग विशेष सक्रिय रहे और इनमें से कई को जेल तक जाना पड़ा था। जिसके बाद जनता में आक्रोष बढ़ता गया और आंदोलनकारियों की एकजुटता के बल से ‘संघर्ष समिति’ का जन्म हुआ।
33 दिनों तक चला था अनशन
1960 से प्रारंभ हुआ यह आंदोलन 20 सालों तक चलता रहा, लेकिन सरकारें आती गईं और जाती गईं, किसी ने भी धौलपुर के लोगों की समस्याओं का जानना तक मुनासिब नहीं समझा, लेकिन लोगों की आस तब बढ़ी जब 6 जून 1980 को जगन्नाथ पहाडिय़ा राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, क्योंकि इससे पहले वह धौलपुर को जिला बनाने की पैरवी कर चुके थे, लेकिन 13 महीने बाद 1981 में जगन्नाथ पहाडिय़ा को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया और 15 अप्रेल 1982 को शिवचरण माथुर मुख्यमंत्री बने, लेकिन हालात तब भी नहीं बदले। संघर्ष समिति के बेनर तले आकर राजनेताओं सहित अन्य संगठनों ने आंदोलन प्रारंभ करते अनशन शुरू कर दिए। जानकार बताते हैं कि यह अनशन 33 दिनों तक चला। आखिर 15 अप्रेल 1982 को वह दिन आ ही गया जब सरकार लोगों की मांग के आके झुक गई और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने धौलपुर को राजस्थान का 27वां जिला घोषित किया। शिवचरण माथुर खुद धौलपुर आए और वर्तमान कचहरी में जिला बनाने की शिलालेख का उद्घाटन किया।
क्या पाया...और अभी क्या पाना शेष
44 सालों के लंबे संघर्ष के बाद धौलपुर को सुविधाएं तो मिल रही हैं, लेकिन अभी भी जिले को बहुत कुछ पाना है। अगर इन सालों की बात करें तो धौलपुर ने बहुत कुछ पाया भी है। जिसमें जिले को सैंपऊ उपखंड, धौलपुर नगर पालिका से नगर परिषद, गल्र्स कॉलेज, मिलिट्री स्कूल, लॉ कॉलेज, थर्मल पॉवर, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, नवीन न्यायालय भवन, एनएच 11 बी, धौलपुर-भरतपुर हाइवे, नेशनल हाइवे 3 पर ओवरब्रिज जैसी तमाम सुविधाएं मिल चुकी हैं। वहीं धौलपुर को अभी भी बहुत कुछ पाना है। जिसमें एजुकेशन, मेडिकल, खेल स्टेडियम, चंबल लिफ्ट परियोजना, रोजगार, धौलपुर-गंगानगर रेल सेवा,बेहतर सडक़ें, बीहड़ों सहित ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करना, डांग क्षेत्रों के गांवों के लिए पेयजल, उद्योग, दम तोड़ते पत्थर उद्योग को बढ़ावा देना आदि प्रमुख हैं। जिनके लिए जिले के राजनेताओं आमजन को मिलकर प्रयास करने होंगे।
तीन सीएम, गृहमंत्री दिए फिर भी रहे खाली हाथ
44 वर्षों में धौलपुर को शिक्षा, चिकित्सा, आवागमन सहित अन्य क्षेत्रों में पारितोशित तो किया गया, लेकिन समय-समय पर उपेक्षाओं के डंक भी बार-बार मारे गए। धौलपुर का राजनीति के गलियारों में भी हमेशा दबदबा रहा है। यह अब तक 3 मुख्यमंत्री पांच कार्यकाल, वित्त मंत्री, गृह मंत्री, उद्योग मंत्री जैसे ओहदेदार व्यक्ति प्रदेश की विभिन्न सरकारों में दिए हैं, लेकिन फिर भी आज सडक़ों से उड़ती धूल तस्वीर कहानी बयां करती है। देखा जाए तो जिस तरह विकास की इबारत यहां लिखी जानी चाहिए थी वह लिखी नहीं गई।
1982 का धौलपुर- 15 अपे्रल 1982 को भरतपुर से अलग होने के दौरान धौलपुर की जनसंख्या 6 लाख के आसपास थी।
- 1982 में जिले की साक्षरता दर लगभग 65.5 प्रतिशत के आसपास थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 71.05 और महिला साक्षरता 52.22 प्रतिशत थी।
- जिले में उस वक्त लिंगानुपात- 827 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष हुआ करती थी। (2001 के आंकड़े)
- नवीन जिला बनने के साथ ही तहसीलों का गठन भी हुआ जिनमें धौलपुर, राजाखेड़ा, बाड़ी और बसेड़ी शामिल थीं।- शहर के मुख्य मार्ग 30 से 40 फीट होते थे चौड़े।
2026 का धौलपुर- वर्तमान में धौलपुर जिले की जनसंख्या 14 लाख 50 हजार के आसपास है। (अनुमानित)
- धौलपुर जिले की साक्षरता दर लगभग 75.57 प्रतिशत के आसपास है, जिसमें पुरुष साक्षरता 83.05 और महिला साक्षरता 66.97 प्रतिशत है।
- जिले में इस वक्त लिंगानुपात- 942 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष (नगर पालिका क्षेत्र)
- मौजूदा समय मे जिले में 8 तहसील हो चुकी हैं जिनमें धौलपुर, सैंपऊ, राजाखेड़ा, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा, मनियां, बसईनवाब हैं।
- वर्तमान में शहर के मुख्य मार्ग 10 से 20 फीट ही रह गए।-----
धौलपुर का पूर्व में धवलपुरी उसके बाद धौलागढ़ था जो कि अब धौलपुर हो गया है। धौलपुर का प्राचीन उल्लेख मत्स्य जनपथ के रूप में मिलता है। जिसमें धौलपुर, भरतपुर, करौली अलवर आते हैं। यह क्षेत्र 17 मार्च 1948 को यह संघ राजस्थान में विलय हो गया और धौलपुर भरतपुर का उपखंड बन गया।
- अरविंद शर्मा, इतिहासकार एवं पूर्व डीईओ
धौलपुर तहसील को जिला बनाने की यात्रा बड़ी संघर्षों से भरी है। जिसमें लोगों ने अनशन से लेकर जेलों की यातनाओं तक को झेला है। जिसके बाद ही धौलपुर को जिले का दर्जा मिल सका। देखा जाए तो जिला बनने के बाद भी यह राजनेताओं के उपेक्षा शिकार रहा है। यही कारण है कि यहां अभी भी मेडिकल से लेकर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने होंगे।
-अतुल भार्गव, एडवोकेट
Published on:
15 Apr 2026 06:20 pm
