
एआई तस्वीर
धौलपुर/करौली। दशकों के इंतजार के बाद करीब 16 वर्ष पहले स्वीकृत धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना को लेकर अब बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस परियोजना के अंतर्गत सरमथुरा-गंगापुरसिटी नई लाइन को केंद्र सरकार ने रेल अधिनियम 1989 के प्रावधानों के तहत विशेष रेल परियोजना घोषित कर अधिसूचित किया है।
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रेल मंत्रालय के उत्तर मध्य रेलवे निर्माण विभाग की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई है। इस घोषणा से परियोजना के द्वितीय चरण को गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। वहीं प्रथम चरण में धौलपुर-सरमथुरा के बीच कार्य प्रगति पर है और भूमि अधिग्रहण के तहत करीब 1 अरब 20 करोड़ रुपए के अवार्ड वितरित किए जा चुके हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2010-11 में इस रेल परियोजना को स्वीकृति मिली थी, लेकिन शुरुआत से ही इसकी गति धीमी रही। वर्ष 2012-13 में सर्वे कार्य हुआ और 2013 में सरमथुरा में शिलान्यास किया गया। इसके बाद कार्य शुरू होकर बीच में रुक गया और फिर दोबारा शुरू किया गया। प्रथम चरण में धौलपुर से सरमथुरा तक करीब 69 किलोमीटर आमान परिवर्तन का कार्य उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के अधीन किया जा रहा है। वहीं द्वितीय चरण में सरमथुरा से करौली होते हुए गंगापुरसिटी तक रेल लाइन का विस्तार किया जाना है।
विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही निर्माण, रखरखाव और संचालन कार्य भी तेज गति से किए जा सकेंगे। अब टेंडर और निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है।
परियोजना के प्रथम चरण में नैरोगेज से ब्रॉड गेज में परिवर्तन का कार्य जारी है, जबकि द्वितीय चरण में करीब 76 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का कार्य वर्षों से लंबित है। अब विशेष रेल परियोजना घोषित होने के बाद इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के लोगों का वर्षों पुराना रेल सपना साकार हो सकेगा।
इस रेल परियोजना के पूर्ण होने पर धौलपुर और करौली के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही कैलामाता के दरबार में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। हर वर्ष उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
यह परियोजना पूरी होने पर करौली जिला मुख्यालय भी रेल लाइन से जुड़ जाएगा। साथ ही गंगापुरसिटी-दौसा रेल मार्ग से जुड़कर जयपुर से धौलपुर तक एक नया रेल कॉरीडोर विकसित हो सकेगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
यह परियोजना दो चरणों में करीब 144.6 किलोमीटर लंबी है। प्रथम चरण में 69.74 किलोमीटर लाइन को नैरोगेज से ब्रॉड गेज में बदला जा रहा है। इस खंड में तीन रेलवे स्टेशन लगभग तैयार हो चुके हैं और इस ट्रैक पर दिसम्बर 2026 तक ट्रेन संचालन का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे ने प्रथम चरण में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत अब तक करीब 6500 लोगों को 1 अरब 20 करोड़ रुपए के अवार्ड वितरित किए हैं। अभी लगभग 45 करोड़ रुपए और वितरित किए जाने शेष हैं। कुल मिलाकर इस मद में करीब 165 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है।
Updated on:
14 Apr 2026 08:57 pm
Published on:
15 Apr 2026 06:00 am
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