24 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Dholpur: जिले के चार महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलों में लगेंगी हिंदी की कक्षाएं

जिले के चार महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में एक बार फिर बच्चे हिंदी माध्यम की पढ़ाई करेंगे। यह कदम उन स्कूलों को बंद करने से बचाने की कवायद है, जिनमें बच्चों का नामांकन 70 से कम है।
3 min read
Google source verification
Dholpur news

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय

धौलपुर. राज्य के 300 से अधिक स्कूलों सहित जिले के चार महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में एक बार फिर बच्चे हिंदी माध्यम की पढ़ाई करेंगे। यह कदम उन स्कूलों को बंद करने से बचाने की कवायद है, जिनमें बच्चों का नामांकन 70 से कम है। जिसके लिए शिक्षा मंत्री के निर्देश पर ब्लॉकवार सूची के साथ बकायदा नामांकन और शिक्षकों की संख्या जारी कर निदेशालय ने इस संबंध में जिला शिक्षा विभागों से सात दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन में राज्य भर में अंग्रेजी माध्यम के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय प्रारंभ किए गए थे। राज्य में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन 2019-20 में हुआ था, जिनकी शुरुआत सर्वप्रथम जिला मुख्यालयों पर की गई थी। पीसीसी चीफ डोटासरा के शिक्षा मंत्री काल में 2021 में इन्हें पांच हजार की आबादी वाले गांवों व कस्बों में भी शुरू कर दिया गया। सरकार के इस फैसले से शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देना माना गया था, लेकिन जल्द ही इन स्कूलों खासकर ग्रामीण इलाकों में संचालित स्कूलों में नामांकन घटने के साथ इन स्कूलों पर प्रश्न चिह्न खड़े होने लगे। सरकार बदलने के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलवार ने भी इन स्कूलों पर निशाना भी साधा था।

स्कूलों में नामांकन कम होने के बाद शिक्षा मंत्री ने चिंता जताने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अगले पखवाड़े के भीतर नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। जिन स्कूलों में पर्याप्त भवन और कक्ष उपलब्ध हैं, वहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं एक ही पाली में चलेंगी। वहीं, जगह की कमी वाले स्कूलों में दोनों माध्यम अलग-अलग पालियों में संचालित किए जाएंगे। हालांकि जानकारों का मानना है कि अंग्रेजी के साथ हिंदी माध्यम के संचालन से गांवों की महात्मा गांधी स्कूलों में हिंदी माध्यम में नामांकन बढऩे की संभावना ज्यादा रहेगी। ऐसे में संभव है कि बाद में इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम खत्म कर इन्हें फिर से सामान्य स्कूल ही बनाए जा सकते हैं।

फैसले को लेकर सियासत भी प्रारंभ

राज्य के महात्मा गांधी स्कूलों में गिरते नामांकन के बाद इन्हें बंद करने के कयास लगाए जा रहे थे, तो वहीं जानकारों का मानना था, कि स्कूल बंद नहीं तो इनका पैटर्न बदलने की कार्रवाई सरकार कर सकती है। इसी कड़ी में सरकार ने इन स्कूलों में हिंदी माध्यम को भी शामिल करने जा रहा है। हालांकि सरकार के इस फैसले को नवाचार के साथ सियासी रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को कमजोर करने की कोशिश बताया है, जबकि भाजपा ने इसे व्यावहारिक फैसला करार दिया है। सरकार ने पहले से अध्ययनरत बच्चों को कोई परेशानी न हो इसके लिए भी स्पष्ट किया है कि पहले से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई उसी माध्यम में जारी रहेगी। नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों का विकल्प मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे अभिभावकों को सुविधा मिलेगी और स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा।

जिले के यह चार महात्मा गांधी स्कूल

देखा जाए तो यह सब स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया कि कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 70 से भी कम रह गई है। जिनमें धौलपुर जिले ६० महात्मा गांधी स्कूलों में से चार स्कूल शामिल हैं। इनमें महात्मा गांधी कंचनपुर, महात्मा गांधी अब्दुलपुर, महात्मा गांधी गोपीनाथ राजाखेड़ा और महात्मा गांधी बसेड़ी राजकीय स्कूल शामिल हैं। जिनमें अब सरकार सरकार अंग्रेजी माध्यम जारी रखते हुए हिंदी माध्यम की कक्षाएं भी संचालित करेगी। ताकि इन स्कूलों में नामांकन बढ़ाया जा सके। राज्य में सबसे अधिक 34 स्कूल जयपुर में प्रभावित हैं। इसके बाद सीकर (27), चूरू (22), जोधपुर (22), बीकानेर (18), दौसा (15), डूंगरपुर और बांसवाड़ा (14-14), भरतपुर (13), जालोर (12) तथा फलोदी और उदयपुर (11-11) और धौलपुर जिले के (४) स्कूलों में नामांकन बेहद कम पाया गया।