
सरकारी जमीन पर बनी दुकाने
Dholpur, राजाखेड़ा. खनन में बड़े खेल के बाद अब राजाखेड़ा उपखंड में करोड़ों की सरकारी भूमि पर भू-माफिया और उपखंड प्रशासन की कथित दोस्ताना से कब्जे और संपत्तियां खड़े कर लेने का मामला सामने आया है। जहां अधिकारी संपर्क पोर्टल पर काम रुकवाने का दावा कर रहे थे, वहीं माफिया उनकी मेहरबानी से दिन रात निर्माण कर आधा दर्जन कीमती दुकानों का निर्माण पूरा करने में जुटे थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह अकेली भूमि नहीं है, उपखंड़ की सैकड़ों सरकारी भूमि सिर्फ कागजों में दर्ज हंै वास्तविकता में उनपर माफिया का पूरा कब्जा या फिर कहीं-कहीं कुछ निर्माण भी है। आरोप है कि सारा खेल जिम्मेदार अधिकारियों के मित्रवत कारनामों से चल रहा है और वे कागजों में उनको बचाने की पूरी व्यवस्था तक कर रहे हैं। अब मामला जन अभाव अभियोग निराकरण एवं सतर्कता समिति में दर्ज होने के बाद अब हडक़ंप मच गय है और लोग लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रकरण की जांच अब विजिलेंस से कराने का निर्णय समिति ने किया है।
कागजों में रोका, फिर भी हो गया निर्माण कार्य
आगरा मार्ग पर सीमा पर बसे ग्राम सिंघावली खुर्द और सिकरौदा ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपए की बेशकीमती सरकारी सिवाचक भूमि है। सूत्रों ने बताया कि इस ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा सरकारी भूमि है। जिस पर स्थानीय भू-माफियाओं और राजनीतिक रसूखदारों का कब्जा है। इसी में से कुछ भूमि पर ग्राम पंचायत ने कचरा संग्रहण केंद्र व जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी बनाने के लिए आवंटित की गई, लेकिन यह भौगोलिक रूप से यह कीमती थी और इसकी कीमत दो से ढाई करोड़ रुपए आंकी जा रही थी। इस भूमि पर भू-माफिया ने अवैध रूप से व्यावसायिक दुकानें खड़ी आरम्भ की गईं तो ग्रामीणों ने विरोध किया, लेकिन दबंगों ने सुनने की जगह विरोध करने वालों को धमकाना शुरू किया तो लोगों ने उपखंडाधिकारी को ज्ञापन देकर कार्य रुकवाने की मांग की। मामला सामने आते ही लीपापोती आरम्भ करते हुए ग्राम पंचायत ने भी एक पत्र उपखंडाधिकारी व तहसीलदार को अतिक्रमण हो जाने का सौंपा। जिसपर उसी दिन हल्का पटवारी भी मौके पर पहुंचा और मौका पर्चा बनाकर लिख दिया कि आधा दर्जन लोगों को अतिक्रमण न करने को पाबंद किया गया है।
शिकायत दी अवैध निर्माण की, रिपोर्ट में कार्य रुकवाने का किया था दावा
मामले को लेकर ग्राम श्रीनगर निवासी गौरी शंकर ने स्थानीय राजस्व प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2 जुलाई को ही उपखंड अधिकारी और तहसीलदार को लिखित पत्र देकर इस अवैध निर्माण की जानकारी दी थी। हालांकि, तहसीलदार कार्यालय की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि 2 जुलाई को ही काम रुकवा दिया गया था, लेकिन धरातल पर सच इसके ठीक उलट है। स्थानीय पटवारी और गिरदावर की कथित ढिलाई के चलते माफियाओं ने रातों-रात दुकानों का पक्का ढांचा खड़ा कर दिया। उनका आरोप है कि क्षेत्र का एक दबंग जनप्रतिनिधि ही अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए इस सरकारी भूमि के करीब 3 बिस्वा हिस्से पर स्वयं की व्यावसायिक दुकानों का निर्माण करवा लिया है, ताकि भविष्य में इसे गलत तरीके से नियमित कराया जा सके। बाकी में छोटे माफिया को हिस्सेदारी दे दी जाती है।
जिला सतर्कता समिति से न्याय की गुहार...
स्थानीय प्रशासन की ढिलाई और संदिग्ध भूमिका को देखते हुए पीडि़त गौरी शंकर ने अब जिला कलक्टर एवं अध्यक्ष जिला जन अभाव अभियोग निराकरण एवं सतर्कता समिति धौलपुर के समक्ष विधिक प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत तत्काल विशेष पुलिस बल भेजकर इस अवैध व्यावसायिक अतिक्रमण को ध्वस्त किया जाए। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के जुर्म में सभी नामजद दबंगों और भू-माफियाओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज हो। शिकायत के बावजूद जानबूझकर मौन रहने वाले लापरवाह राजस्व कर्मियों के खिलाफ सख्त सतर्कता जांच बिठाई जाए। वहीं समिति ने आवेदन को स्वीकार भी कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अकेली संपति नहीं बल्कि लगभग सभी सरकारी सम्पत्तियां दबंगों के हाथों में है जिन्हें मुक्त कराया जाना चाहिए।
Updated on:
24 Jul 2026 06:49 pm
Published on:
24 Jul 2026 06:49 pm
