
गुप्त सूचना पर प्लांटों पर छापा, मिलावटी दुग्ध उत्पाद देख पुलिस के होश उड़े
dholpur, राजाखेड़ा. दशकों से मिलावटी, दूषित, सिंथेटिक मावा, पनीर, घी और दूध के निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुके राजाखेड़ा में स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता के बाद सक्रिय हुए पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा ने प्रशासन की आंखें खोलते हुए नकली और सिंथेटिक मावा के कारखानों पर डीएसटी के मुखबिर तंत्र के माध्यम से खोजबीन आरम्भ कराई तो हालात बेहद चिंताजनक मिले। जिस पर विशेष टीम और दिहौली पुलिस के साथ मिलकर मिलावटी दुग्ध उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की।
पुलिस टीम ने राजाखेडा़ थाना क्षेत्र में सोनपाल का पुरा गांव में साहबसिंह बघेल के बॉयलर प्लांट पर छापा मारा। यहां अखाद्य पदार्थों की दुर्गंध ने टीम के होश उड़ा दिए। पुलिस को देख कार्य कर रहे श्रमिक और मालिक भाग निकला। इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दी। जिस पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी पदम सिंह परमार व टेकनोलॉजिस्ट नवीन कुमार मोबाइल वैन समेत मौके पर पहुंचे। टीम ने जांच के बाद मौके पर मिले 960 किलो मावे को प्रथम दृष्ट्या मिल्क पाउडर, डिटर्जेंट, वनस्पति तेल आदि अखाद्य पदार्थों से निर्मित सिंथेटिक मावा मानते हुए उसके सैम्पल लेकर शेष मावे को नष्ट करवा दिया। मामले में राजाखेड़ा थाने में आरोपी प्लांट मालिक के विरुद्ध प्रकरण दर्ज हुआ।
इसी तरह टीम ने राजाखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव महाजीत का पुरा गांव में प्रदीप कुमार पुत्र शिवसिंह ठाकुर के बॉयलर प्लांट पर जांच की। यहां भी पहले जैसे हालात मिले। खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम बुलवा कर नमूने लिए। प्लांट में 1280 किलो सफेद मावा ओर 160 किलो भुना मावा बरामद हुआ। जांच में प्रथम दृष्टया सिंथेटिक और अखाद्य पदार्थों से बना मिला। सैम्पल लेकर शेष को नष्ट करवा दिया। प्लांट पर बदबूदार घी और क्रीम भी बरामद की गई है। बता दें कि मिलावटी दुग्ध उत्पादों की पुलिस और खाद्य विभाग की टीम ने लगातार दो दिन जांच की। हालांकि, इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से जानकारी नहीं दी है। लेकिन गुपचुप कार्रवाई ने मिलावट का धंधा करने वालों की धडकऩ बढ़ा दी है।
शादियों ओर त्योहारों पर होनी थी खपत
पुलिस व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार यह तैयार मावा इस माह बड़ी संख्या में होने वाली शादियों में तो खपत होनी थी। जानकारों ने बताया कि इस मावे को त्योहारों पर पूर्ति के लिए आगरा और धौलपुर मंडी में भेजा जाता है। जहां से निजी बस और ट्रकों ट्रकों से आगरा, भरतपुर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर और गुजरात के साथ मुम्बई तक भेजा जाता है। जहां पर मिष्ठान विक्रेता और हलवाई इस मिलावटी और सस्ते मावे का प्रयोग मिठाइयां बनाने में करते हैं।
मानवीय जीवन के लिए बेहद खतरनाक
इस मावे में मिल्क पाउडर, डिटर्जेंट, वनस्पति तेलों का बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। साथ ही तैयार मावे को जल्द खराब होने से बचने के लिए विभिन्न खतरनाक रसायनों का भी प्रयोग किया जाता है। ये सभी मानव स्वास्थ्य पर बेहद गंभीर प्रभाव डालते है। गांवों में दूध भी इसी प्रक्रिया से सिंथेटिक तैयार किया जाता है, जिसे दूधिया विक्रय के लिए लेकर जाते हैं।
गांवों में खुले पड़े हैं बायलर प्लांट
चिंताजनक तथ्य ये है कि गांव गांव में ऐसे बॉयलर प्लांट सिंथेटिक मिल्क माफिया ने लगा रखे हैं। जहां बड़ी मात्रा में ये मिलावटी सिंथेटिक मावा बनाया जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग भी गाहे बगाहे त्योहारों पर छोटी मोटी दुकानों पर सैंपलिंग कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। लेकिन यह प्रभावशाली माफिया राजनीतिक संरक्षण में दिन रात इसी कार्य को अंजाम देकर आमजन के स्वास्थ्य पर बेहद गम्भीर खतरा पैदा कर रहे हैं।
बीट कांस्टेबलों को नहीं नजर आ रहा मिलावटी खेल
कहने को तो पुलिस थानों में भी बीट प्रणाली लागू है और पूरे क्षेत्र को बीट्स में बांट कर कांस्टेबलों को उनका प्रभारी बनाया जाकर गांव की हर गतिविधि पर नजर रखने की जिम्मेदारी है। राजाखेड़ा थाना क्षेत्र में गांव गांव खुले बॉयलर प्लांट्स इस बीट प्रणाली और अधिकारियों की सुपरविजन पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार एसपी ने कार्रवाई को लेकर विशेष टीम गठित कर चिह्नित स्थानों पर जांच करवाई। जिससे मिलावटी दुग्ध उत्पादों का खेल पकड़ में आया।
सामग्री विक्रेताओं पर नहीं हुई कार्रवाई
मामले में बड़ा तथ्य ये है कि राजाखेड़ा मुख्यालय पर एक दर्जन ऐसे विक्रेता है जो सिंथेटिक मिल्क और मावा, पनीर तैयार करने के लिए लिक्विड ग्लूकोज, मिल्क पाउडर, और खतरनाक केमिकल्स की बड़ी मात्रा में बिक्री करते हैं। सिंथेटिक दुग्ध, मावा, पनीर माफिया सारा कच्चा माल इन्हीं से खरीद करता है लेकिन वे अभी तक पुलिस की नजर से बचे हुए हैं। उधर, लोगों का कहना है कि प्रशासन को आमजन को घटिया और मिलावटी माल परोस रहे नेक्सस पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
कार्रवाई के बाद फिर सुलग जाती हैं भट्टियां
बता दें कि बीच-बीच में आकस्मिक कार्रवाई से कुछ दिन कारखाने बंद रहते हैं लेकिन इसके बाद यह वापस शुरू हो जाते हैं। बता दें कि मई 2022 में भी धौलपुर के रीको क्षेत्र में पुलिस ने एक स्थान पर गुप्त सूचना पर दबिश दी। यहां भी भारी मात्रा में मिलावटी मावा और मिठाई मिली थी। उस समय नमूने भरवा और माल को नष्ट करवा दिया। सूत्रों के अनुसार उक्त कार्रवाई के कुछ दिन बाद यह मिलावटी खेल वापस शुरू हो गया। खास बात ये है कि इसकी जानकारी खाद्य विभाग समेत अन्य एजेंसियों पर थी लेकिन इसके बाद भी चुप्पी साधकर बैठ गए। इस तरह का खेल जिले में कई स्थानों पर चल रहा है।
देश में दुग्ध उत्पादों की स्थिति चिंताजनक
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं। विज्ञानं एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी तरह की मिलावट पाई है। भारत दुग्ध उत्पाद के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। लेकिन यहां मिलावटी दुग्ध उत्पाद कहीं ज्यादा है। अगर आंकड़ों को देखें तो तो देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता हैए जबकि खपत 65 करोड़ लीटर है
मिलावट खाद्य पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारण होता है। इसमें जो मिलावट के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। वह स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी नुकसान दायक है। इसके लगातार सेवन से फूड पाउजिंग की दिक्कत, कैंसर होने की संभावना, उल्टी, दस्त, लीवर, किडनी सहित पेट संबंधी रोग होने की संभावना रहती है।
- डॉ. दीपक जिंदल, सीनियर फिजिशियन, जिला अस्पताल धौलपुर
Published on:
06 Apr 2024 06:20 pm
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