
100 किमी दूर तक पहुंचा पानी, चंबल किनारे बसे गांवों को नहीं हुआ नसीब
धौलपुर. जिला मुख्यालय से कुछ किलो मीटर की दूरी पर स्थित गांव समौला व भैंसेना के लोगों को आजादी के 76 साल बाद भी समस्याओं से निजात नहीं मिल पाई है। स्थानीय ग्रामीण आज भी मूलभूत समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं। खास बात ये है कि क्षेत्र की जिस जीवनदायनी चंबल नदी सैकड़ों लोगों की प्यास बुझा रही है और भरतपुर संभाग मुख्यालय से आगे कुम्हेर-डीग उपखण्ड तक पानी पहुंचाने की तैयारी है लेकिन तक इन गांवों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। जो सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है।
साथ ही उन नेताओं पर भी प्रश्न चिह्न लगा रहा है तो चुनावी मौसम में तरह-तरह के वादे कर मतदाताओं को लुभाते हैं लेकिन बाद में पांच साल बाद में इन्हें अपने हाल भी छोड़ देते हैं। रविवार को पत्रिका टीम ने गांवों में हालत जाने तो समस्याओं का ढेर लगा हुआ था। गांव में करीब 60 वर्ष से रह रहे मतदाताओं ने बताया कि यहां किसी भी सरकार ने गांव में पानी उपलब्ध की सुध नहीं ली। गांव अभी तक पानी नहीं पहुंच पाया है। जबकि यहां से 100 किलोमीटर दूर भरतपुर तक पानी पहुंच चुका है। यहां चंबल किनारे बसे कई गांव में आज भी पानी के लिए मोहताज हैं, जो विकास की गाथा पर सवाल खड़ा करते हैं। पानी आम व्यक्ति मूलभूत जरुरतों में से सबसे ऊपर है। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में हर पांच साल में विभिन्न दलों के प्रत्याशी आते हंै और वादे करके जाते हैं। लेकिन विधानसभा पहुंचने पर उन्हें वादे तो दूर गांव का रास्ता तक याद नहीं रहता है। गांव की समस्याओं पर रामवरन, सिकंदर, राजवीर, प्रमोद, मुन्नालाल, विक्की, प्रवीण आदि ने समस्याओं के बारे में बताया।
पेयजल सबसे अहम समस्या
समौला गांव के रामबाबू ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। प्रधानमंत्री की हर घर पानी योजना भी लोगों के गले तक नहीं पहुंच पाई। पेयजल के लिए खेतों में कुएं से पानी लेकर आना पड़ता है। जल स्तर नीचा होने से यहां पर बोरिंग करना महंगा और मुश्किल भरा है। जिसमें पानी की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
स्कूल तक सडक़ नहीं, कई समस्या बरकरार
ग्रामीण क्षेत्र मे बच्चों के पढऩे के लिए स्कूलों तक जाने के लिए पक्की सडक़ें नहीं हैं। जिससे कई बार सडक़ को बनवाने की मांग की। लेकिन कोई भी प्रतिनिधि चुनाव के बाद विकास कार्य को भूल जाते हैं। अब फिर चुनाव का समय आया तो फिर वादे की चिट्टी लेकर आने लगे। उसके पूरा करने का आश्वासन देने भी लगे, लेकिन अभी तक गांव में रोशनी के लिए विद्युत पोल पर एक बल्व तक नहीं लग पाया है।
गांव दीवारों पर लिखा हर घर पानी
गांव भैंसेना सहित अन्य में दीवारों पर लिखा कि हर घर पानी पहुंच रहा है। लेकिन यहां आज भी तीन किलोमीटर दूर कुएं से ग्रामीणों को पानी लेकर आना पड़ रहा है। जबकि यह गांव मुख्यालय से केवल 8 किलोमीटर ही पानी के लिए परेशानी बनी हुई है। सरकार के जनप्रतिनिधि भी समस्याओं को दूर नहीं कर सकें।
समस्याएं दूर नहीं हुई तो गांव छोड़ा
गांव की समस्याओं को कोई नेता दूर नहीं कर सका। यहां पर रहने वाले ग्रामीणों ने अपने परिवार के साथ गांव से निकलकर दूसरे शहर में रहने चले गए। जिससे उनकी आने वाली पीढ़ी गांव में मूलभूत सुविधाओं से न जूझना पड़े। जिससे वह बाहर के ही रहवासी हो गए। कई और परिवार हालातों को देख कर शहर की तरफ जाने का मन बना रहे हैं।
- चंबल नदी क्षेत्र इलाके में कई गांव बसे हैं। लेकिन सरकार आज तक यहां तक पानी उपलब्ध नहीं करवा सकी है। जबकि भरतपुर से अलवर पानी पहुंचा रहे हैं। 76 साल बाद भी गांव के लोग कुओं से पानी लेकर प्यास बुझा रहे हैं। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी बनी हुई हैं। जिन पर कोई ध्यान नहीं देता।
- गोपीचंद, ग्रामीण भैंसेना
- चार साल से गांव का सरपंच हूं। किसी भी प्रतिनिधि की ओर से गांव के विकास कार्य के लिए कोई बजट नहीं मिला है। जिससे ग्राम पंचायत समस्याओं से जूझ रही है। कई बार इसको लेकर उच्चाधिकारियों से मिल चुका हूं, पर कोई असर नहीं हुआ। अब चुनावी मौसम में प्रत्याशी और अन्य नेता आकर विकास के वादे कर रहे हैं।
- यादव सिंह, सरपंच, गांव भैंसेना
Published on:
20 Nov 2023 07:04 pm
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