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World Schizophrenia Day: बार-बार शक करने की आदत है तो हो जाइए सावधान, हो सकती है यह खतरनाक बीमारी

World Schizophrenia Day: सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है। वर्तमान में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में हर तीन सौ लोगों में दो व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त हैं।

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World Schizophrenia Day: सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है। वर्तमान में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में हर तीन सौ लोगों में दो व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त हैं। इस बीमारी को लेकर समाज में कई भ्रांतिया हैं लेकिन अपनों का साथ और स्नेह मिले तो मरीज में काफी हद तक सुधार हो सकता है। जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों को सही मदद दिलाने के लिए प्रतिवर्ष 24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस मनाया जाता है। उक्त बीमारी से पीड़ित मरीज जिले में भी सामने आ रहे हैं। जिनका इलाज चिकित्सकों की निगरानी में हो रहा है।

जिला अस्पताल में मानसिक रोग चिकित्सक डॉ.सुमित मित्तल ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 7 से 10 मरीज आ रहे हैं जो सिजोफ्रेनिया बीमारी से ग्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी आमतौर पर 15 से 27 वर्ष उम्र के युवाओं में अधिक मिल रही है। लेकिन जागरूकता की कमी से मरीज को अस्पताल तक आने में देरी होती है। जिससे वह धीरे-धीरे इस बीमारी का असर बढ़ जाता है। जिले में 390 मरीज इस बीमारी से ग्रस्त हैं जिनका इलाज चल रहा है। जो हर बीस दिन में जांच कराने आते हैं। नियमित जांच से मरीजों में काफी सुधार है। सिजोफ्रेनिया एक असाध्य बीमारी है। समाज में अंधविश्वास है कि इसके मरीज दोहरे व्यक्तित्व के होते हैं जबकि यह सच नहीं होता।

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मस्तिष्क में कुछ रसायनों के असंतुलन के कारण मरीज की सोच, भावना और उनकी गतिविधियों में फर्क देखने को मिलता है। दवाओं से बीमारी नियंत्रण में आ सकती है। लेकिन इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। समय पर इलाज मिलने पर ही ये दवाएं असरकारक हो सकती है। देरी से इलाज पर दवा का असर कम होता है। जिससे व्यक्ति के अंदर संदेह के विचार आना शुरू हो जाते है। उनका दिमाग कहीं न कहीं दूसरे व्यक्ति पर संदेह करने लगता है।

ये हैं लक्षण

- संदेह होना कि कोई पीछा कर रहा
- सोचता है कि उसे कोई मारना चाह रहा है
- ऐसी चीजों को सच मानना जो झूठी होती हैं
- बात-बात पर झगड़ा-लड़ाई करना
- अविश्वसनीय आवाजें सुनाई देना
- न होने के बावजूद कुछ दिखाई देना
- अचानक गुमसुम रहने लगना

नियंत्रण व बचाव के उपाय

- परिवार के साथ रहना और प्यार मिलना
- शुरूआती दौर में ही समुचित इलाज
- मरीज को प्रोत्साहित रखना
- नशे से जागरूक और दूर रखना

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