
बेर को सुखाकर और बारीक पीसकर बनाया गया सत्तू कफ व वायु दोषों का नाश करता है।
बेर के फल, पत्ती, वृक्ष की छाल, गोंद आदि में औषधीय गुण पाए जाते हैं। जी घबराने, उल्टी और गर्भावस्था में होने वाले पेटदर्द को रोकने में भी यह काफी फायदेमंद होता है।
आयुर्वेद के अनुसार बेर हृदय के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। इन्हें खाने से बार-बार प्यास लगने की शिकायत नहीं रहती।
बेर को सुखाकर और बारीक पीसकर बनाया गया सत्तू कफ व वायु दोषों का नाश करता है।
आकार में छोटे-छोटे बेर खट्टे-मीठे होते हैं, इन्हें झड़बेर भी कहा जाता है। इन्हीं बेरों से सत्तू भी बनाया जाता है।
बेर को नमक और काली मिर्च के साथ खाने से अपच की समस्या दूर होती है।
बेर को छाछ के साथ लेने से घबराहट, उल्टी और पेटदर्द की समस्या में आराम मिलता है।
रोजाना बेर खाने से अस्थमा और मसूड़ों के घाव को भरने में मदद मिलती है।
इन्हें खाने से खुश्की और थकान दूर होती है।
बेर और नीम के पत्ते पीसकर सिर पर लगाने से बालों का झड़ना कम होता है।
Published on:
05 Feb 2019 01:20 pm
बड़ी खबरें
View Allडाइट फिटनेस
स्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
