
follow these 7 ayurvedic tips to stay healthy in winter ayurvedic diet for winter health news
Ayurvedic diet for winter : सर्दियों का मौसम केवल ठंड का अहसास ही नहीं लाता, बल्कि हमारे शरीर को गर्म रखने और स्वास्थ्य को बनाए रखने की चुनौती भी पेश करता है। आयुर्वेद, जो जीवन और स्वास्थ्य का विज्ञान है, सर्दियों के दौरान आहार और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देने की सलाह देता है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में आयुर्वेद के अनुसार कैसे स्वस्थ रह सकते हैं।
श्रीमद्भागवत गीता और मनुस्मृति भी तो आहार का मन पर पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र करते हैं। सात्विक, राजसिक और तामसिक भोजन की बात करते हैं जिसमें सात्विक आदर्श तो तामसिक निम्न दर्जे का माना जाता है।
आयुर्वेद में आहार को (Ayurvedic diet for winter) औषधि के रूप में देखा गया है। ऋतुचक्र के साथ हमारे शरीर की पाचन अग्नि भी बदलती है। सर्दियों में पाचन अग्नि तेज होती है, इसलिए पोषण से भरपूर और गर्म तासीर वाले भोजन का सेवन करना चाहिए। ठंडे और कच्चे खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि ये शरीर को सुस्त बना सकते हैं।
घी और तेल: आयुर्वेद घी, नारियल तेल और सरसों के तेल के उपयोग की सलाह देता है। ये त्वचा की नमी बनाए रखते हैं और शरीर को भीतर से गर्म रखते हैं।
मसाले: हल्दी, अदरक, काली मिर्च और दालचीनी जैसे मसाले न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सर्दियों में शरीर को गर्म भी रखते हैं।
गाजर, शकरकंद, चुकंदर और मूली जैसी सब्जियां विटामिन और मिनरल्स का खजाना हैं। ये पेट को भरा हुआ महसूस कराती हैं और ओवरईटिंग से बचाती हैं। इनका नियमित सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होता है।
सर्दियों में साबुत अनाज जैसे जौ, ओट्स और मक्का ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत हैं। ये शरीर को गर्म रखने के साथ पाचन को भी सुगम बनाते हैं। इन्हें भोजन में शामिल करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
सर्दियों में ठंडे पेय पदार्थों की बजाय गर्म पेय जैसे हर्बल चाय, अदरक-हल्दी वाला दूध, और सब्जियों का सूप पिएं। ये न केवल शरीर को गर्म रखते हैं, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं।
सर्दियों में नियमित व्यायाम करना शरीर को सक्रिय बनाए रखता है। इसके साथ ही, गर्म तेल से शरीर की मालिश करना त्वचा को मुलायम और शरीर को ऊर्जावान बनाता है। व्यायाम और मालिश का संयोजन शरीर को ठंड से बचाने का सबसे बेहतर तरीका है।
सर्दियों में जंक फूड की बजाय देसी और गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। उपवास से बचें, क्योंकि यह पाचन अग्नि को नुकसान पहुंचा सकता है। नियमित और संतुलित आहार से वात दोष को नियंत्रित किया जा सकता है।
Published on:
27 Nov 2024 10:31 am
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