
चीनी कम खाने के फायदे अच्छी सेहत और नींद भी
चीनी अधिक खाने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढऩे से मेटाबोलिज्म (ट्राइग्लिसराइड्स) बढ़ जाता है। इससे मोटा पा के साथ स्ट्रोक और हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ता है। रिफाइंड शुगर के कारण मीठे के प्रति मोह बढ़ता है। मिठाई वजन बढ़ाती है। इसलिए वेट कम करने से पहले चीनी कम करने या छोडऩे की सलाह दी जाती है।
बढ़ती है इम्युनिटी
चीनी क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन का कारक है। इससे इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इस कारण यह सर्दी जुकाम के बैक्टीरिया से प्रभावी मुकाबला नहीं कर पाता है। चीनी कम करके आप एल र्जी और अस्थ मा के साथ श्वसन संबंधी समस्या ओं से बच सकते हैं।
देरी से आता बुढ़ापा
शुगर कम करने से ब्लड में शुगर यानी ग्लू कोज का लेवल कम होता है। इससे समय पूर्व एजिंग यानी बुढ़ापे की सम स्या से बचा जा सकता है। क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन के कारण स्किन पर झुर्रियां और ढीला पन भी आता है। विशेष ज्ञों की मानें तो चीनी छोडऩे के कु छ समय के बाद ही इसका असर दिखने लगता है।
तनाव घटता
सोने से पहले मीठी चीजें, शरबत या आइस क्रीम आदि खाना छोड़ दें। चीनी से स्ट्रेस हार्मो न सक्रिय हो जाते हैं, जो अनि द्रा के कार ण हो सकते हैं। ज्यादा मीठा खाने से लॉन्ग टर्म में डिप्रे शन (तनाव) का खतरा रहता है। इसलिए मीठा कम खाएंगे तो मिजा ज अच्छा रहे गा। कई अन्य समस्या ओं से भी बचे रहेंगे।
बरकरार रहती है मुस्कान
दां तों की कैविटीज का प्रमुख कारण चीनी यानी टॉफी, चॉक लेट, मिठाइ यां आदि हंै। इनसे बैक्टीरि या बढ़ते हैं और मुंह में अम्ल बनाते हैं जिससे दांतों में सडऩ होने लगती है। चीनी छोड क़र आप दांतों को साफ, स्वस्थ और सुंदर रख सकते हैं। सांसों की ताज गी और मुस्कान को भी बरक रार रख सकते हैं।
Published on:
10 Jul 2018 05:27 am
बड़ी खबरें
View Allडाइट फिटनेस
स्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
