इन तरीकों को अपनाकर स्वस्थ रह सकती हैं महिलाएं

ज्यातादर महिलाएं अपने घर-परिवार में व्यस्त होने के कारण अपनी सेहत (health) पर ध्यान नहीं दे पातीं। ऐसे में उम्र के साथ होने वाले शारीरिक, मानसिक व हार्मोनल बदलाव से कई रोगों की आशंका बढ़ जाती है। व्यायाम (exercise), सही दिनचर्या व पौष्टिक खानपान (healthy diet) से सेहतमंद रहा जा सकता है। यह तभी संभव है जब महिलाएं अपने लिए समय निकालें।

By: जमील खान

Published: 16 Apr 2021, 08:24 PM IST

ज्यातादर महिलाएं अपने घर-परिवार में व्यस्त होने के कारण अपनी सेहत (health) पर ध्यान नहीं दे पातीं। ऐसे में उम्र के साथ होने वाले शारीरिक, मानसिक व हार्मोनल बदलाव से कई रोगों की आशंका बढ़ जाती है। व्यायाम (exercise), सही दिनचर्या व पौष्टिक खानपान (healthy diet) से सेहतमंद रहा जा सकता है। यह तभी संभव है जब महिलाएं अपने लिए समय निकालें।

ये होती दिक्कत
हार्मोनल बदलाव (hormonal changes) से अनियमित पीरियड्स की शिकायत, कमजोरी से स्वभाव में चिड़चिड़ापन व थकान, ब्लड प्रेशर (blood pressure), डायबिटीज (diabetes) व तनाव की तकलीफ, कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर होना, कमर-जोड़ोंं में दर्द, एस्ट्रोजन कम बनने से मनोरोग, गर्भाशय संबंधी रोगों की आशंका, मेनोपॉज शुरू होने से हृदय रोगों, एनीमिया आदि की दिक्कत हो सकती है।

2 घंटे दोपहर में बाई करवट से लेटें, हृदय रोगों से बचाव होगा।

35-40 साल की उम्र के दौरान रोजाना दूध जरूर पीना चाहिए।

अहम कारण
हार्मोन्स में बदलाव होना मुख्य कारण है। इसके अलावा प्रमुख रूप से छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज करना भी बड़ी बीमारी की वजह बनता है। खानपान पर ध्यान न दे पाना, कमजोर इम्युनिटी, पर्यावरण में बदलाव और प्रदूषण भी कई रोगों की आशंका बढ़ाता है। धूम्रपान, जंक फूड और तनाव भी वजह हैं।

ऐसे रह सकती हैं फिट
नियमित संतुलित व पौष्टिक डाइट लें। हरी पत्तेदार सब्जियां व मौसमी फल खाएं। एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम व फाइबर युक्त चीजें लें। 35 से 40 साल की उम्र में रोज दूध पीएं। 45 मिनट वर्कआउट रोज करें।

इससे रोगों की आशंका 50 फीसदी घट जाती है। स्विमिंग, एरोबिक्स, साइक्लिंग, रस्सीकूद, वॉक-जॉगिंग करें। तनाव से बचने के लिए योग, प्राणायाम व ध्यान करें। खाली पेट बिल्कुल न रहें। रोजाना 8 घंटे और दोपहर में बाईं करवट से 2 घंटे की नींद लें।

ब्लड प्रेशर की जांच अन्य रोगों से बचाएगी।

मेमोग्राफी टैस्ट से ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता लग सकेगा।

गर्भाशय संबंधी समस्या की पहचान के लिए पैप स्मियर टैस्ट हर तीन साल में कराना चाहिए।

पांच साल में एक बार थायरॉइड टैस्ट।

वजन न बढऩे दें।

हड्डियों की मजबूती का पता बीएमडी टैस्ट से चलता है।

ध्यान रखें : घी के साथ बिना पोलिश के चावल, जौ का दलिया, घी लगी जौ की रोटी, चावल मिश्री घी यदि खाती हैं, तो हैल्दी रह सकती हैं।

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जमील खान
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