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23 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर लिपिक

शासकीय कार्यालयों में कामकाज ठप

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Clerk on strike for 23-point demands

file photo

डिंडोरी। शासकीय कार्यालयों की रीड़ की हड्डी माने जाने वाले लिपिक सोमवार से कामबंद हड़ताल पर बैठ गये हैं। जिससे शासकीय कार्यालयों में सन्नाटा पसर गया है और सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। इनके अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से सबसे ज्यादा असर शासकीय भुगतान और न्यायालय संबंधी कार्य पर पडऩे की आशंका जताई गयी है। चूंकि तहसील, अनुविभागीय दंडाधिकारी तथा कलेक्टर न्यायालय के लिपिक भी हड़ताल में शामिल हैं। लिहाजा इन न्यायालयों की पेशी एवं प्रकरण प्रभावित हुये हैं। वहीं नामांतरण बंटवारा तथा प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों पर भी सीधा असर पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले लम्बे समय से वेतन विसंगति समेत अन्य 23 मांगों को लेकर लिपिक लामबंद थे। पिछले 17 जुलाई से लिपिक काली पट्टी बांध विरोध जता चुके थे और मांग पूरी न होने एवं संतोषजनक आष्वासन न मिलने पर म.प्र. लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के बैनर तले जिले के लगभग तीन दर्जन विभागों के तकरीबन 350 लिपिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं। शासन के नाम सौंपे गये ज्ञापन में संघ ने अन्य पदों के बढ़े वेतन का हवाला देकर शासन पर लिपिक वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया है।
सहायक यंत्री नहीं दे रहे टीएस
डिंडोरी। अमरपुर विकासखंड अंतर्गत बरसिंघा एवं बोधघुंडी निवासी लगभग दो दर्जन किसान अपने कृषि भूमि में कृमि पालन हेतु शहतूत की खेती करना चाहते हैं। उक्त कार्य के लिये शासन द्वारा अनुदान का प्रावधान है जिसके लिये संबंधित सहायक यंत्री द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्रदान करना अनिवार्य होता है, लेकिन संबंधित सहायक यंत्री द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने के लिये आनाकानी की जा रही है। किसानों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की है। कृषकों ने अपने लिखित आवेदन में उल्लेख किया है कि उनके द्वारा निजी भूमि में कृमि पालन हेतु पौधारोपण करना चाहते हैं। इस संबंध मं इनके द्वारा रेशम विभाग से भी संपर्क स्थापित कर खेती करने को लेकर जानकारी जुटा चुके हैं, लेकिन तकनीकी स्वीकृति के अभाव में प्रकरण तैयार नहीं कर पा रहे हैं और शासन की योजना के लाभ से वंचित हैं। आवेदनकर्ता में गया सिंह राजाराम, केशव प्रसाद, रूप सिंह, मंती बाई, धुन्नी बाई, धरमवती, निरोत्तम, रामकुमार, हेमराज, दयाराम, चंद्र सिंह, भीम सिंह, सकरती, चंद्रभान, देव सिंह, गनेशवती, डिम्मी बाई, महिया बाई, सुंदरिया बाई और भागवत शामिल हैं।