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भूख-प्यास से दम तोड़ देते हैं परिंदे, दाना-पानी का उठाया बीड़ा

सेव बर्ड सेव इनवायरमेंट अभियान

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Parinde dies of hunger and thirst, raised grain and water

Parinde dies of hunger and thirst, raised grain and water

डिंडोरी. गर्मी में जल स्त्रोतों के सूखने से परिंदों को आसानी से पानी नहीं मिल पाता परिणाम स्वरूप हजारों परिंदे प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में काल के ग्रास बन जाते हैं। पक्षियों की संख्या लगातार कम होने के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है, पक्षियों का जीवन अति आवश्यक है। मेकलसुता महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थी बेजुवान पक्षियों को बचाने के लिए उनके दाना पानी की व्यवस्था कर सेव बर्ड सेव इनवायरमेंटश अभियान चला रहे हैं। डॉ.लीला भलावी अतिरिक्त संचालक जबलपुर संभाग के निर्देशानुसार महाविद्यालय की एनएसएस इकाई के विद्यार्थियों द्वारा जिले के विभिन्न कस्बों, गांव, पंचायतों के अनेक स्थानों पर पक्षियों के लिए सकोरे बांधे जा रहे हैं। विद्यार्थी लॉक डाउन के कठिन समय में शासन के निर्देशों का पालन करते हुए घरों की छत, बालकनी, ऑगन, पेड़ की शाखाओं पर पानी के लिए मिट्टी के बर्तन लटका कर परिंदों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। महाविद्यालय के संचालक इंजी अनुराग बिलैया ने कहा कि हमें स्वयं साथ-साथ दूसरों के बारे में भी सोचना होगा। विद्यार्थियों द्वारा यह बहुत ही सराहनीय कार्य किया जा रहा है, इससे प्रकृति के प्रति हमारी जागरूकता प्रदर्शित होती है। रजिस्ट्रार डॉ. प्रदीप द्विवेदी ने कहा कि ऐसे सामाजिक कार्यों से दूसरों को प्रेरणा मिलती है। हम जितना समय खुद पर देते हैं उतना ही हमें समाज और देश के बारे में भी सोचना होगा तभी हम समाज और देश के लिए कुछ कर सकते हैं। प्राचार्य डॉ. बीएल द्विवेदी ने कहा कि कोरोना की इस विषम परिस्थिति में सभी को एक दूसरे का साथ देना होगा तभी हम इस कठिन दौर से निकलेंगे। महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ. बीएस द्विवेदी ने विद्यार्थियों के इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की और बधाई दी साथ ही यह भी कहा कि अपने लिए तो सभी जीते हैं हमें दूसरों का भी ध्यान रखना चाहिए, यही मानवता का धर्म है। अभियान प्रभारी प्रो. एनएस पटेल ने बताया कि 01 मई से 15 मई तक यह अभियान चलाया गया जिसके अन्तर्गत सौ से अधिक स्थानों पर पक्षियों के लिए सकोरे बांधे गए हैं तथा स्थानीय लोगों को सकोरे में दाना, पानी डालने के लिए प्रेरित किया गया है। अभियान में एनएसएस प्रभारी प्रो. डीआर राठौर एवं समस्त स्टॉफ का योगदान रहा।