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महिलाओं को मिलेगा किसान मुखिया का दर्जा

संवाद का आयोजन

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Women will get Kisan chief status

डिंडोरी. महिलाओं को भले ही पचास प्रतिशत आरक्षण की बात की जाती हो लेकिन आज भी उसे समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल सका है। शासन की ओर से भी उसे पचास प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। लेकिन महिला को परिवार में मुखिया का दर्जा और किसान का दर्जा नहीं दिया गया है जबकि यदि देखा जाये तो ग्रामीण महिलायें घर की पूरी जिम्मेदारी के साथ साथ खेती किसानी का 80 प्रतिशत कामकाज संहालती हैं। ऐसे में उन्हें किसान और मुखिया का दर्जा मिलना चाहिये। इस तरह के कदम से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम इसे माना जाएगा
एकता महिला मंच के द्वारा विगत दिवस महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन बैगाचक के रंजरा गांव में किया गया। जिसमें उक्त बातों पर महिलाओं के साथ विमर्श किया गया। आयोजन में प्रमुख रूप से पुलिस अधीक्षक कार्तिकेयन के की मौजूदगी रही। इसके साथ ही महिला मंच की जिला और शोभा तिवारी आयोजकों के रूप में रहीं। जिल ने इस अवसर पर कहा कि महिलायें सर्वाधिक कार्य करती हैं इसके बाद भी उन्हें किसान का दर्जा नहीं दिया जाता है। घरेलू कामकाज के अतिरिक्त खेतों में सर्वाधिक काम करने के साथ ही जंगल जाकर वनोपज संग्रहण कर अपने परिवार को मजबूती प्रदान करती हैं, बावजूद इन्हें व्यापक अधिकारों से वंचित किया गया है। यदि महिलाओं को इस तरह के अधिकार दे दिये जाते हैं तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा वे खेती को बेहतर ढंग से करने की दिशा में काम करेंगी। शासकीय योजनाओं में भागीदारी कर कृषि के क्षेत्र में प्रगति करेंगी। फि लहाल उन्हें किसान का दर्जा नहीं मिला है, जिस कारण वे खेती से जुडे निर्णय लेने में पीछे हैं। किसी भी समाज में महिलाओं के योगदान को कम नहीं आंका जा सकता है। यदि उन्हें किसान का दर्जा दिया गया तो भूमि संबंधित समझ उनमें विकसित होगी और बेहतर ढंग से विकास होगा। आयोजन में पुलिस अधीक्षक ने भी महिलाओं से संवाद कर इलाके में कॉरीडोर आदि से संबंधित भ्रांतियों की जानकारी दी और इस तरह की किसी भी भ्रामक जानकारी से दूर रहने या किसी भी संशय की स्थिति में प्रशासन और पुलिस से संवाद कर उसका निराकरण करने की अपील की। इलाके में सक्रिय भूमिका निभाने वाली शोभा तिवारी ने बैगा महिलाओं को संबोधित करते हुये कहा कि लंबे समय के संघर्ष के बाद उन्हें भूमि का अधिकार मिला है लेकिन अब भूमि के प्रबंधन को लेकर हमें चिंता करनी है। आजीविका सुनिश्चित कर परिवार और समाज का विकास करना है। महिलायें हर क्षेत्र में आज प्रगति कर रही हैं और हमें अपनी भूमि का सही उपयोग कर विकास की दिशा में आगे बढऩा है।