
ओस्टियोपोरोसिस से जुड़ी कई भ्रांतियां जैसे यह रोग सिर्फ महिलाओं को होता है, 50 की उम्र के बाद ही हड्डियां कमजोर होती हैं, लोगों के जहन में है। जानते हैं इनकी सच्चाई -
अगर आपको लगता है कि हड्डियों के खोखले या कमजोर होकर टूटने की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ महिलाओं को ही होती है तो आप गलत हैं। चार में से एक पुरुष भी इससे पीड़ित है। आमतौर पर 30 की उम्र से इस रोग की शुरुआत होती है और हड्डी के टूटने पर इसका पता लगता है। बोन डेंसिटी टैस्ट से भी उम्र के विभिन्न पड़ावों पर इस रोग का पता लगा सकते हैं। इसका कोई विशेष लक्षण नहीं। लेकिन ओस्टियोपोरोसिस से जुड़ी कई भ्रांतियां जैसे यह रोग सिर्फ महिलाओं को होता है, 50 की उम्र के बाद ही हड्डियां कमजोर होती हैं, लोगों के जहन में है। जानते हैं इनकी सच्चाई-
इसमें व्यक्ति को हड्डियां कमजोर महसूस होने लगती हैं ?
जवाब : गलत।
ओस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डियों के कमजोर होने का अहसास बिल्कुल नहीं होता। हल्की सी चोट, झटका या बिना किसी वजह फै्रक्चर होने की स्थिति में इसका पता लगता है। इसके लिए बोन डेंसिटी टैस्ट कराना पड़ता है।
हड्डियों की सेहत के लिए ज्यादा चलना नुकसानदायक है।
जवाब : नहीं, वॉक फायदेमंद है।
वॉक, जॉगिंग, एरोबिक्स या कोई भी वर्कआउट जिसमें पैर जमीन पर दबाव डालें बेहतर है। वजन उठाना हड्डियों के लिए अच्छा है, लेकिन ज्यादा वजन नुकसान पहुंचाता है। एक्सपर्ट की सलाह जरूरी है।
ओस्टियोपोरोसिस की समस्या सिर्फ महिलाओं को होती है?
जवाब : गलत।
यह समस्या पुरुषों से लेकर टीनएजर्स तक में हो सकती है। हालांकि 80 प्रतिशत आशंका महिलाओं में होती है। क्योंकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की हड्डियां छोटी और पतली होती हैं।
केवल डेयरी प्रोडक्ट्स में ही सर्वाधिक कैल्शियम होता है?
जवाब : नहीं, डेयरी प्रोडक्ट्स व अन्य में।
सभी डेयरी प्रोडक्ट्स में कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है, लेकिन दही में सबसे ज्यादा होती है। संतरे का जूस, बादाम, चावल और सोया मिल्क में भी कैल्शियम भरपूर होता है।
शरीर में आवश्यक कैल्शियम की मात्रा न होने पर हड्डियों से कैल्शियम लिया जाने लगता है?
जवाब : सही।
शरीर को कैल्शियम की जरूरत होती है व कमी होने पर यह हड्डियों से लेना शुरू कर देता है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर होने और फै्रक्चर की आशंका बढ़ जाती है।
50 पार उम्र होने पर एक्सरसाइज से हड्डियों के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है?
जवाब : गलत।
इस उम्र में हड्डियों के नए ऊत्तकों का निर्माण भले ही बहुत कम हो लेकिन वर्कआउट से ऊत्तकों के टूटने की गति धीरे हो जाती है। इसलिए सावधानी बरतें। ओस्टियोपोरोसिस होने पर डॉक्टरी सलाह से 30 मिनट तक एक्सरसाइज जरूर करें। साथ ही शारीरिक तौर पर खुद को घरेलू कार्य में शामिल रखें।
अधिक उम्र में हड्डियां कमजोर होने लगती हैं?
जवाब : नहीं, 30 की उम्र से।
हमारी हड्डियां बढ़ते हुए ऊत्तक हैं जिनका काम कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स एकत्रित करना है। 30 की उम्र तक हमारे शरीर में जिस गति से हड्डियों के पुराने ऊत्तक टूटकर उनकी जगह नए ऊत्तक लेते हैं, 35 की उम्र तक यह प्रक्रिया उल्टी होने लगती है। हड्डियों के ऊत्तक तेजी से टूटते तो हैं लेकिन नए धीमी गति से बनते हैं। इससे ओस्टियोपोरोसिस की आशंका बढ़ती है।
कैल्शियम के लिए रोजाना दूध पीना चाहिए।
जवाब : हां, साथ में दही भी जरूरी है।
स्वस्थ व्यस्क को एक दिन में एक हजार मिग्रा कैल्शियम की जरूरत होती है। दूध व दही के अलावा हरी सब्जियों में भी कैल्शियम अधिक होता है। बच्चे व युवाओं को करीब 1300 मिग्रा कैल्शियम की जरूरत होती है।
यदि मां को ओस्टियोपोरोसिस है तो यह बच्चे को भी हो सकता है?
जवाब : सही।
परिवार की मेडिकल हिस्ट्री मायने रखती है लेकिन कई उपाय हैं जिनसे बचाव संभव है। दूध, कैल्शियम और विटामिन-डी स्त्रोत वाली चीजों के अलावा फल, हरी सब्जियां खानी चाहिए। शराब से दूरी बनाए रखें।
विटामिन-डी लेने के लिए ज्यादा से ज्यादा धूप में बैठें।
जवाब : नहीं।
सूर्य की रोशनी और दूध, संतरे का जूस आदि से विटामिन-डी मिलता है। इनके बिना हमारा शरीर कैल्शियम अवशोषित नहीं कर पाता और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। सुबह 8-11 बजे की धूप में बैठना काफी है।
क्यों होता है ओस्टियोपोरोसिस-
हड्डियां जीवित ऊत्तक हैं जिनमें तंत्रिकाएं, रक्त वाहिनियां व बोन मैरो होते हैं। हड्डियों के स्वत: ही टूटने व उसकी जगह नई हड्डी बनने की प्रक्रिया लगातार चलती है। 20 तक की उम्र के युवाओं में टूटने वाली हड्डियों से कहीं ज्यादा तेजी से नए ऊत्तकों का निर्माण होता है। उम्र के साथ यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है। महिलाओं में मेनोपॉज होने पर नए ऊत्तकों का बनना कम हो जाता जिससे हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है।
Published on:
27 Jul 2019 04:21 pm
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