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यदि करवा चुके हैं जोड़ प्रत्यारोपण तो इन बातों का ध्यान रखें

आमतौर पर देखा जाता है कि मरीजों को जोड़ प्रत्यारोपण से पूर्व की तो सभी जानकारी होती है लेकिन सर्जरी के बाद का ज्ञान कम होता है। हम उस अवस्था की बात कर रहे हैं जब जोड़-प्रत्यारोपण का ऑपरेशन कराए 4-6 हफ्ते गुजर चुके हों।
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जयपुर

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Vikas Gupta

Feb 14, 2019

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आमतौर पर देखा जाता है कि मरीजों को जोड़ प्रत्यारोपण से पूर्व की तो सभी जानकारी होती है लेकिन सर्जरी के बाद का ज्ञान कम होता है। हम उस अवस्था की बात कर रहे हैं जब जोड़-प्रत्यारोपण का ऑपरेशन कराए 4-6 हफ्ते गुजर चुके हों।

घुटनों का जोड़ प्रत्यारोपण मरीज को जिन्दगी में एक उमंग और आशा की किरण प्रदान करता है। आमतौर पर देखा जाता है कि मरीजों को जोड़ प्रत्यारोपण से पूर्व की तो सभी जानकारी होती है लेकिन सर्जरी के बाद का ज्ञान कम होता है। हम उस अवस्था की बात कर रहे हैं जब जोड़-प्रत्यारोपण का ऑपरेशन कराए 4-6 हफ्ते गुजर चुके हों।

घुटने मोड़ने आदि क्रियाएं -
ऑपरेशन के बाद नियमित क्रिया-कलापों के लिए कुर्सी का इस्तेमाल ही ठीक रहता है। लेकिन अगर आपका घुटना पूरा मुड़ता है तो आप पाल्थी मारकर भी बैठ सकते हैं। नियमित रूप से जमीन पर बैठने से बचें। सीढ़ियां चढ़ने के लिए रेलिंग का सहारा लेना चाहिए।

नियमित व्यायाम व चेकअप -
ऑपरेशन के 4-6 हफ्ते बाद आप घूमने का समय बढ़ाएं और 25-30 मिनट सुबह व शाम व्यायाम करें। मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए घुटने व कूल्हे के व्यायाम करें। घुटना प्रत्यारोपण कराने वाले मरीज साल में एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं। प्रत्यारोपित जोड़ में किसी भी प्रकार की समस्या एक्स-रे में आने पर उसका तुरंत इलाज होना चाहिए। जोड़-प्रत्यारोपण करा चुके मरीज को किसी भी प्रकार की सर्जरी, दांतों का इलाज, पेशाब में जलन, फोड़ा आदि होने पर डॉक्टर से संपर्क कर एंटी बायोटिक दवाएं लेनी चाहिए।

ये सावधानी बरतें -
सर्जरी के बाद एक से डेढ़ किलोमीटर तक नियमित घूमना आवश्यक है और इसमें 250 मीटर हर हफ्ते बढ़ोतरी होनी चाहिए। तीन से चार माह के बाद तीन किलोमीटर घूमना चाहिए।

सर्जरी के बाद स्वीमिंग, साइक्लिंग, गोल्फ एवं बैडमिंटन खेला जा सकता है लेकिन फुटबॉल, वॉलीबॉल व बास्केटबॉल आदि न खेलें। घाव भरने और टांकें निकलने के बाद उस स्थान को नियमित रूप से साबुन व पानी से धोएं। सूती कपड़े से साफ करने के बाद नारियल तेल या क्रीम लगानी चाहिए। घाव वाले स्थान पर खुजाएं नहीं। साथ ही एड़ियों का ध्यान रखें। डायबिटीज के मरीज का अगर ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं है तो सर्जरी के कुछ माह बाद संक्रमण हो सकता है इसलिए रेगुलर चेकअप कराते रहें। जकड़न पर मौसम के बदलाव का भी प्रभाव होता है। इसके लिए मरीज कोई भी गतिविधि शुरू करने से पहले घुटने और टखने के जोड़ को 5-10 बार घुमाएं।

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