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स्मोकिंग ही नहीं, इन कारणों से भी आपके फेफड़े हो रहे बीमार

लंग कैंसर अवेयरनेस मंथ (नवंबर) स्मोकिंग ही नहीं, प्रदूषण से भी खतरा।

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Pawan Kumar Rana

Nov 23, 2017

Lung cancer

Lung cancer

फेफड़ों (लंग) का कैंसर सबसे तेजी से फैलने वाला कैंसर बन गया है जो हर उम्र के लोगों को बीमार बना रहा है। फेफड़े के कैंसर का प्रमुख कारण सिगरेट, बीड़ी व चिलम पीना है। आनुवांशिक होने के अलावा वातावरण में तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण भी इसकी एक चिंताजनक वजह बन गया है।

ऑक्सीजन देते फेफड़े
फेफड़े सीने के बीच में होते हैं जिसे थौरेक्स कहते हैं। इसका काम सांस के जरिए अंदर जा रही हवा (ऑक्सीजन) को फिल्टर कर रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंचाना है। लगातार धूम्रपान करने वाले (एक्टिव स्मोकर) या धूम्रपान करने वालों के करीब रहने वाले (पैसिव स्मोकर) के गुणसूत्र में बदलाव होने से कैंसर कोशिका हावी होती है जो लंग कैंसर की वजह बनती है। ऐसे में कैंसर कोशिकाओं के बढऩे से यह अन्य अंगों में फैलने लगता है। इससे अन्य रोग भी हो सकते हैं।

जांच और इलाज का तरीका
सीटी स्कैन, पेट सीटी स्कैन, एक्स-रे टिश्यू डायग्नोसिस, बायोप्सी जांच और एफएनएसी के अलावा फेफड़े की क्षमता जांचने के लिए पल्मोनरी फंक्शन टैस्ट (पीएफटी) करते हैं। इसके बाद फस्र्ट व सेकंड स्टेज पर सर्जरी से कैंसर को 80-90 फीसदी ठीक करना संभव है। थर्ड व फोर्थ स्टेज में कीमोथैरेपी, रेडियो थैरेपी, टार्गेटेड और इम्यूनोथैरेपी देते हैं।

2 तरह का कैंसर
लंग कैंसर दो तरह (स्मॉल सेल और नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर) का है। स्मॉल बहुत तेजी से अंगों में फैलने की क्षमता रखता है। इसके 30-40 फीसदी ब्रेन में जाने का खतरा रहता है जिससे रोगी की अचानक मौत हो सकती है। वहीं नॉन स्मॉल लंग कैंसर का ट्यूमर बड़ा होता है। समय रहते इसका पता चल जाए तो गंभीर समस्या से बच सकते हैं।

लक्षण... लंबे समय से खांसी, कफ, बलगम में कभी कभार खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, वजन घटना, भूख न लगना, बहुत जल्दी थक जाना प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।

बचाव... सबसे पहले धूम्रपान की लत छोड़ें। सिगरेट पीने वालों से दूर रहें। सांस या खांसी हो तो जांच कराएं। टीबी भी फेफड़ों के कैंसर की वजह हो सकती है। अच्छा खानपान लें व नियमित एक्सरसाइज करें।

सिगरेट, बीड़ी, चिलम और गांजा में निकोटिन के साथ आठ हजार से अधिक केमिकल्स कैंसर कारक कार्सिनोजेनिक होते हैं। इसमें 70 से अधिक केमिकल्स नुकसान पहुंचाते हैं जो लंग कैंसर का कारण बनते हैं। खास बात यह है कि लंबे समय से इनका इस्तेमाल करने वालों में सांस संबंधी समस्या कभी न कभी जरूर होती है जिससे तकलीफ बढ़ती जाती है।