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विधायक बोले, काम नहीं करना है तो क्यों आते हो, बीडीओ बोली, आईएम रेडी टू गो

विधानसभा चुनाव के बाद जिला परिषद डूंगरपुर की पहली साधारण सभा बैठक सोमवार को ईडीपी सभागार में जिला प्रमुख माधवलाल वरहात की अध्यक्षता में हुई।

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Dungarpur zilla parishad

डूंगरपुर। विधानसभा चुनाव के बाद जिला परिषद डूंगरपुर की पहली साधारण सभा बैठक सोमवार को ईडीपी सभागार में जिला प्रमुख माधवलाल वरहात की अध्यक्षता में हुई। इसमें डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा काफी तीखे तेवरों में नजर आए।

चौरासी विधायक राजकुमार रोत ने भी योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं होने पर अधिकारियों को उदाहरणों के साथ घेरा। डूंगरपुर विधायक घोघरा और बिछीवाड़ा विकास अधिकारी कुमुद सोलंकी के बीच तीखी नोंक झोंक हो गई। विधायक ने पंचायत समिति बिछीवाड़ा में कोई काम नहीं होने के आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया कि काम नहीं करना है तो डूंगरपुर आते ही क्यों हो? इस पर विकास अधिकारी सोलंकी भी आक्रोशित होकर बोल उठी कि सरकार के आदेश पर आई हूं, आर्ई एम रेडी टू गो. . .।

यूं भडक़ा विवाद
विधायक घोघरा ने कहा कि बिछीवाड़ा में कोई काम नहीं हो रहे। मनरेगा में मात्र आठ हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है। मस्टरोल तक जारी नहीं हो रहे हैं। सारे सरपंच शिकायत कर रहे हैं। ऐसे अधिकारी मेरी विधानसभा में नहीं चाहिए। इस पर विकास अधिकारी सोलंकी ने कहा कि कौन कह रहा है कि काम नहीं हो रहे। सभी चीजें ऑनलाइन हैं, आप देख लीजिए। जहां तक सरपंचों की शिकायत की बात है तो एक अक्टूबर 2018 को एक रात में एईएन ने घर पर बैठकर 200 से अधिक स्वीकृतियां निकाल दी थी। यह स्वीकृतियां निरस्त करने के कारण ही सभी को परेशानी हो रही है।

विधायक ने अपने आरोपों को दोहराते रहे और विकास अधिकारी भी आक्रोशित होकर उनका प्रतिकार करती रही। इसलिए पनपी बीटीपी सदन के नेता प्रतिपक्ष भगवतीलाल रोत ने टीएसपी अधिसूचना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अधिसूचना के तहत उपयोजना क्षेत्र में होने वाली भर्तियों में 45 प्रतिशत एसटी के लिए, 5 प्रतिशत एससी के लिए और शेष 50 प्रतिशत ओपन पद का प्रावधान है।

जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एसटी, एससी, ओबीसी आदि वर्गों को उनकी केटेगरी में ही आवेदन करने के आदेश दिए। इससे एसटी-एससी के बच्चे सामान्य मेरिट में नहीं आ रहे हैं। इससे कई पदों का नुकसान हुआ है। यही वजह है कि डूंगरपुर जिले में बीटीपी पनपी है। यह सुनते ही सदन कुछ क्षण के लिए अवाक सा रह गया और बाद में हंसी फुट पड़ी। बीटीपी से जुड़े दोनों विधायक भी हंसने लगे।

काम नहीं करना तो बोरी बिस्तर बांध लो
बैठक की शुरूआत से ही विधायक घोघरा तल्ख अंदाज में दिखे। पं.दीनदयाल विद्युतीकरण योजना को लेकर सवाल किए। कई जगह लंबे समय से काम बकाया होने, अवैध वसूली की शिकातयों पर भी कार्रवाई नहीं होने पर घोषणा ने निगम के अधीक्षण अभियंता एन.एल.सालवी तथा योजना से जुड़े अभियंता को साफ शब्दों में कह दिया कि काम नहीं करना है तो बोरियां बिस्तर बांध लो. . । अब तो शर्म आने लगी है. . . सीमलवाड़ा प्रधान निमिषा भगोरा ने सरथूना ग्राम पंचायत में विद्युतीकरण का काम पूरा नहीं होना पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि ढाई साल से मैं यह बात उठा रही हूं और हर बार आप आश्वासन दे रहे हो। अब तो कहने से भी शर्म आती है। इस पर अभियंता ने अगले बैठक से पूर्व काम पूर्ण कराने का आश्वासन दोहराया। भर्तियां क्यों नहीं हो रही पूरी बैठक में जिपस गिरीश पाटीदार, विधायक घोघरा, रोत आदि ने एलडीसी, जेटीए की भर्तियां अधिकारियों द्वारा जानबूझ कर अटकाए रखने के आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि कोर्ट स्टे टीएसपी क्षेत्र के लिए नहीं है, फिर भी नहीं की जा रही है। इस पर कलक्टर ने सीईओ नम्रता वृष्णि और एसीईओ रौनक बैरागी से जानकारी चाही। इस पर दोनों अधिकारियों ने कहा कि न्यायालय आदेश पर विभाग की ओर से दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों के अनुरुप ही काम किया जाता है। किसी प्रकार की कौताही नहीं बरती गई है।

यह रहे मौजूद बैठक में
जिले के चारों विधायक सहित प्रधान मंजूलादेवी, राधादेवी, महेंद्र बरजोड़, लक्ष्मण परमार, जिपस प्रेमकुमार पाटीदार, वीरेंद्रसिंह सिसोदिया, हंसराज आमलिया, अनीता पण्ड्या सहित सभी सदस्य और अधिकारीगण मौजूद रहे।

यह भी उठे बिन्दू
- राशन की दुकान पर दो माह की सामग्री एक साथ लेने के प्रावधान के बावजूद राशन डीलर नहीं देते। दुकानों पर यह निर्देश स्पष्ट तौर पर अंकित कराए जाएं

- कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण हो
- अन्नपूर्णा दूध योजना में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि गुणवत्ता बनी रहे
- रामसा के तहत चल रहे कामों को तुरंत पूराकर भवन हैंडओवर किए जाएं
- सुराता में बालिका विद्यालय दोबारा शुरू किया जाए
- आंगनवाड़ी भवनों की दशा सुधारी जाए, स्वच्छता का ध्यान रखा जाए
- बीएड छात्रवृत्ति के लंबित आवेदनों का जल्द निस्तारण हो
- अस्पतालों में नि:शुल्क जांच सुविधा के बावजूद मरीजों को बाहर भेजे जाने की जांच और कार्रवाई हो
- जिले भर में झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ सघन कार्रवाई की जाए
- पानी में डूबने या सर्पदंश से मरने जैसी घटनाओं में पोस्टमार्टम सुविधा घटनास्थल पर दी जाए