
सागवाड़ा. भक्त व भगवान के बीच अटूट रिश्ता होता है, नित्य हरि सुमिरन से ईश्वर की अनुभूति होती है। महिपाल मैदान पर रामकथा के दौरान साध्वी गीता दीदी ने कहा कि भौतिक युग में संस्कारों के साथ भारत की प्राचीन संस्कृति व धर्म का समावेश होना जरुरी है। ‘नारायण दीन दयाल भजमन राधे गोपाला’ भजन के माध्यम से पाण्डाल में भक्ति रस की बरसात कराते हुए साध्वी ने कहा कि भक्ति के लिए कोई उम्र नहीं होती, स्वार्थ के लिए की गई भक्ति निष्काम होती है। उन्होंने ‘जाको राखे साइयां’ कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल दुख या मुसीबत में ही नहीं मामूली सी जरुरत के दौरान भी की गई ईश्वर की पूकार व्यर्थ नहीं जाती। साध्वी के ‘म्हारी हूंड़ी स्वीकारो श्यामड़ा गिरधारी’ भजन के दौरान श्रद्धालु झूम उठे।
भाव भक्ति से मनाया राम जन्मोत्सव
भगवान राम के जन्मोत्सव के दौरान समूचा पाण्डाल भगवान के राम के जयकारों के साथ गूंज उठा। राम जन्मोत्सव के तहत समूचे पाण्डाल को गुब्बारे व फर्रियों से सजाया गया था। मंच पर सुसज्जित पालने में भगवान के बाल रूप के दर्शन करने व झुला झुलाने लोगों की होड़ सी मच गई। मुख्य यजमान प्रभुलाल वाडेल, बन्धु पाठक, अरविन्द रणा, अनिल वाड़ेल, नानुभाई पटेल, मुकेश भोई, रामकृष्ण वाड़ेल, उपेन्द्र दर्जी, भंवरलाल शर्मा, दिलीप कोठारी, नटवरलाल उपाध्याय गामड़ा, कुबेरलाल जोशी, नारायणलाल शर्मा, जितेन्द्र सुथार मौजूद थे।
‘संसार का लोक लुभावना रूप छलावा’
आसपुर. अतिशय तीर्थ नीलकंठ महादेव मंदिर पारडाजानी में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में गुरुवार को भगवान कृष्ण ? की बाललीला, गोवर्धनलीला, कृष्ण रूकमणी विवाह आदि प्रसंगों की जीवंत झांकी के साथ व्यास पीठ से भागवत् की महिमा का गुणगान कर श्रोताओं को धर्म पर चलने का संदेश दिया। कथावाचक रमेश भाई शास्त्री ने कहा कि संसार का लोक लुभावना रूप छलावा है। संसार के सुखों की लालसा में आत्मशान्ति एवं मुक्ति मिलना सम्भव नहीं है। विवेक एवं वैराग्य से परिष्कृत एवं परिमार्जित जीवन प्रवाह स्वयं एवं ओरों को आनंदित करते हुए शान्ति से गुजर जाता है।
भक्तिगीतों की संगीतमय प्रस्तुति ने कृष्ण रूक्मणी विवाह के आनंद को बहुगुणित किया। कथा के दौरान हरिकीर्तन में संगीतकार मुकेश भाई व विजयभाई सोनगरा जावरा एवं दल ने ‘आतो नाना नंदलाल नी वार्ता, ज्यारे नाना हता ने गाय चारता, काना कानन में धेनु चरावता, राधा जमनाजी नीर भरवा जावता’ आदि भजनों एवं हरिधुन की स्वर लहरियों ने श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर किया। पंडित महेन्द्रभाई, चन्द्रकान्त के निर्देशन में मुख्य यजमान समस्त पंच पारडाजानी ने पूजन विधान किया। महाप्रसाद का धर्मलाभ नारायणसिंह राजावत नांदली, सूर्यसिंह अहाडा गडाहाटकिया, प्रभुभाई चौधरी धाणी एवं समस्त राजपूत समाज सरमरिया ओडा ने लिया। आयोजन समिति के डॉ. राजेन्द्रसिंह खरोडिय़ा, लोकेन्द्रसिंह नांदली, धनजी पटेल ने स्वागत किया।
‘अष्टांग योग को जीवन का मुख्य अंग बनाएं’
सागवाड़ा. शान्तिकुंज हरिद्वार के देव संस्कृति विश्वविद्यालय की योग योगिनी आयुषी गुप्ता, आकांक्षा उत्तम एवं निष्ठा कश्यप ने महिपाल विद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का अवलोकन किया। योगिनी गुप्ता ने कहा कि जीवन का उद्धार करना हो तो अष्टांग योग को जीवन का मुख्य अंग बनाएं। उन्होंने कहा कि जीवन के साथ मानव का आहार संयमित होना चाहिए। उत्तम एवं कश्यप शिविरार्थियों को योग का महत्व को बताते हुए बच्चों को योग की क्रियाएं करवाई। गायत्री शक्ति पीठ के साधक भगवतीलाल चौबीसा, तुलसीराम व्यास ने भी विचार व्यक्त किए। प्रधानाचार्य भरत व्यास ने कहा कि एक स्वच्छ शरीर में ही स्वच्छ मस्तिष्क का निवास होता है। रामचन्द्र मिशन के प्रचारक प्रदीप भट्ट ने सहज ध्यान के तहत हार्ट फुलनेस की क्रियाओं का अभ्यास करवाया। शिविर संयोजक दिनेशकृष्ण शर्मा ने स्वागत किया। संचालन देवेन्द्र भट्ट ने किया। लक्ष्मीकान्त जोशी ने आभार व्यक्त किया।
पाटोत्सव में छलका उत्साह
धंबोला. पंचदेव मंदिर संस्थान के तत्वाधन में गुरुवार को हनुमान मंदिर का पाटोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर को सजाया गया। पुजारी सुखलाल सेवक ने हनुमान प्रतिमा की आंगी की। सुबह में पूजा-अर्चना के बाद मंदिर की ध्वजा बदली गई। शाम को सुंदरकांड पाठ कर आरती उतार प्रसाद वितरण किया गया। संस्थान के गुणवंत पण्ड्या, किशोर पण्ड्या, लासलशंकर भट्ट, गोपाल पण्ड्या ,नीलेश पण्ड्या, मोहनलाल पण्ड्या, किरीट पण्ड्या आदि मौजूद रहे थे।
Published on:
28 Dec 2017 11:48 pm
बड़ी खबरें
View Allडूंगरपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
