
डूंगरपुर. जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर है। जिला अस्पताल सहित ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों का अभाव और संसाधनों की कमी है। जिला अस्पताल में कई महत्वपूर्ण उपकरण खराब पड़े हैं। इससे मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सोनोग्राफी मशीन सिर्फ दिखावटी
श्री हरिदेव जोशी सामान्य चिकित्सालय डूंगरपुर में कहने को तो बरसों से सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध है, लेकिन सोनोलॉजिस्ट नहीं होने से धूल खा रही है। नि:शुल्क जंाच योजना शुरू होने पर वर्ष 2013 में चिकित्सक का पदस्थापन हुआ, लेकिन कुछ ही माह में वह स्थानांतरण करा कर चले गए। इसके बाद से आज तक मशीन का उपयोग ही नहीं हुआ।
डिजीटल एक्स-रे भी बंद
जिला अस्पताल में लाखों रुपए की लागत से डिजीटल एक्स-रे मशीन लगाई गई है, लेकिन उसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा। कभी फिल्म खत्म होने, तो कभी मशीन खराब होने से अनुपयोगी पड़ी रहती है। वर्तमान में भी मशीन खराब पड़ी है।
सेन्ट्रल ऑक्सीजन सिस्टम भी फेल
जिला अस्पताल में करीब पांच साल पूर्व 20 लाख रुपए खर्चकर सेन्ट्रल ऑक्सीजन सिस्टम लगाया था। वार्ड में सीधे बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप लाइन लगाई। बकायदा सर्वर रूम भी बनाया, लेकिन सिस्टम के लिए ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था नहीं हो पाने से बरसों तक अनुपयोगी रहा। बाद में कुछ समय के लिए सिस्टम शुरू भी किया, लेकिन सफल नहीं हो पाया।
नहीं खुले ब्लड बैंक
वर्तमान में डूंगरपुर और सागवाड़ा अस्पतालों में ही रक्त संग्रहण की व्यवस्था है। सरकार ने पूर्वमें सीमलवाड़ा, बिछीवाड़ा, आसपुर आदि प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ब्लड बैंक स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन सालों तक उपकरण नहीं आए। अब उपकरण आ गए हैं तो स्टाफ नहीं है।ऐसे में कहीं पर भी ब्लड बैंक स्थापित नहीं हो पाया है। इससे मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
Published on:
16 Sept 2017 08:11 pm
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