
डूंगरपुर. जिला मुख्यालय पर आंदोलन के दौरान मौजूदा समाजजन। फोटो पत्रिका
Rajasthan DNT Samaj : राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जेल भरो आंदोलन हुआ। इसमें हजारों की संख्या में आक्रोशित आंदोलनकारियों ने सड़कों पर उतरकर एकजुटता का प्रदर्शन किया। 1 जुलाई को जयपुर में महापड़ाव का ऐलान किया। आंदोलन के तहत निकाली गई आक्रोश रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिला कलक्टर कार्यालय पहुंची। जहां मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता पर आक्रोश व्यक्त कर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। इसके बाद प्रतिनिधि मंडल ने सरकार के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।
अध्यक्ष लालजी राईका ने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी और राज्यव्यापी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समाज की 11 सूत्रीय जायज मांगों को सरकार से पूरा करवाना है। इसमें सबसे प्रमुख मांग डीएनटी समाज को अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण देने की है। आरक्षण की सिफारिश पूर्व में गठित रेनके आयोग और इदाते आयोग की ओर से भी की जा चुकी है। लालजी राईका ने बताया कि इसके अतिरिक्त, देश की सर्वोच्च अदालत ने भी अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में आरक्षण के उप-वर्गीकरण को सही ठहराते हुए डीएनटी समाज को 'ए' वर्ग में रखने की बात कही है।
अध्यक्ष लालजी राईका ने कहा कि राजस्थान में डीएनटी समाज की जनसंख्या कुल आबादी का लगभग 15 प्रतिशत है, जो संख्या के लिहाज से करीब 1.23 करोड़ होती है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद यह समाज आज भी मुख्यधारा से कटा हुआ है। इसलिए, 10 प्रतिशत अलग आरक्षण के साथ-साथ डीएनटी समाज को 10 प्रतिशत राजनीतिक भागीदारी, आवास के लिए पट्टे और जमीन की व्यवस्था तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने की पुरजोर मांग की गई है।
इस मौके पर ललिता गाड़िया लुहार, संजू गाड़िया लुहार, पंकज गाड़िया लुहार, शंकर गाड़िया लुहार, सुभास नाथ कनिपा, सुभास कालबेलिया, नाथूलाल कालबेलिया, नरेंद्र कालबेलिया, गोवर्धन कालबेलिया, ओमप्रकाश कालबेलिया, नटवर कालबेलिया, पोपटनाथ कालबेलिया, कांतिलाल कालबेलिया प्रभु कालबेलिया, बाबूनाथ कालबेलिया, नरेश बंजारा, बालचंद, महीपाल नाथ, दीपक रेबारी सहित कई समाजजन मौजूद रहे।
सह-अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने बताया की यह आंदोलन पिछले दो वर्षों से निरंतर चल रहा है। पूर्व में बालराई (पाली) में आयोजित हुए विशाल "महा-पड़ाव" के बाद सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया था और तब सरकार ने इन मांगों पर विचार करने के लिए तीन महीने का समय मांगा था। परंतु, आज पांच महीने से अधिक का समय गुज़र जाने के बाद भी सरकार वार्ता के लिए वापस नहीं आई।
रतन नाथ कालबेलिया ने आरोप लगाया कि वादे के विपरीत सरकार ने डीएनटी समाज पर दमन की नीति अपनाई। आंदोलन को कुचलने के लिए डीएनटी के 78 सक्रिय आंदोलनकारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और 6 प्रमुख नेताओं को 18 दिनों तक जेल में बंद रखा गया। सरकार की इसी दमनकारी नीति का करारा जवाब देने के लिए अब यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि पूरा डीएनटी समाज, वंचित ओबीसी, वंचित एसटी और वंचित एससी वर्ग खुद चलकर जेल में आ जाएगा, ताकि सरकार अपनी दमनकारी इच्छा को पूरी कर सके।
इसी क्रम में राष्ट्रीय पशुपालक संघ के जिलाध्यक्ष दीपक रेबारी ने युवाओं को आह्वान करते हुए कहा कि सभी युवा साथी तब तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे, जब तक कि हमें हमारा वाजिब हक नहीं मिल जाता। डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष कालूराम योगी ने कहा कि इस लड़ाई में अब केवल डीएनटी समाज ही नहीं, बल्कि समाज के अन्य सभी वंचित वर्ग जैसे- वंचित ओबीसी, वंचित एससी एवं वंचित एसटी वर्ग भी पूरी तरह शामिल हो गए हैं। इन सभी वंचित वर्गों की एकजुट मांग है कि देश और राज्य में 'आरक्षण का उप-वर्गीकरण' अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए। युवा अध्यक्ष भरत सराधना ने कानूनी पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के संस्थापक उपाध्यक्ष भीखू सिंह राईका ने बताया कि सभी वंचित सामाजिक संगठनों ने मिलकर एक “दोस्त प्लस” मॉडल तैयार किया है। इस अनूठे मॉडल के तहत मुख्य रूप से चार बड़े स्तंभ शामिल हैं, डीएनटी, वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी इसके अलावा 'प्लस' के अंतर्गत राज्य के उन सभी प्रगतिशील और न्यायप्रिय समाजों को आमंत्रित किया गया है जो समाज में एक न्यायपूर्ण और पारदर्शी आरक्षण व्यवस्था का खुला समर्थन करते हैं। राईका ने दावा किया कि इन चार वर्गों के लोग अब पूरी तरह से आंदोलनरत हैं।
Updated on:
06 Jun 2026 10:33 am
Published on:
06 Jun 2026 10:32 am
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