
अभिषेक श्रीवास्तव
गुजरात बॉर्डर से सटे डूंगरपुर जिले में स्वच्छता का एक अलग ही स्तर देखने को मिलता है। प्रदेश का यह एकमात्र जिला है, जो स्वच्छता के मापदण्ड पर खरा उतरता है। अगर यहां की सियासत की बात करें तो स्वच्छता से इतर यह उलझी हुई नजर आ रही है। जिले की तीन विधानसभा सीटों डूंगरपुर, चौरासी और सागवाड़ा में सियासत नए मोड़ पर खड़ी है। लड़ाई पार्टियों की बजाय ध्रुवों में है। मुकाबला भले ही भारतीय आदिवासी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच हो, लेकिन चेहरों के पीछे छिपे मोहरे कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। विधानसभा चुनावों में जिनके खिलाफ हुंकार भरी थी, उन्हीं का झंडा उठाने में माननीयों में हिचकिचाहट भी है।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट पर दूसरे चरण की ग्राउंड रिपोर्ट का जायजा लेने के लिए जब मैं डूंगरपुर पहुंचा तो रास्ते में लोगों से बातचीत के दौरान ही अहसास हो चुका था कि यहां लड़ाई काफी कड़ी है। डूंगरपुर से धम्बोला होते हुए जब सीमलवाड़ा पहुंचा तो गोवर्धन पाटीदार से मुलाकात हो गई। उन्होंने कहा कि पानी बड़ी समस्या है। क्षेत्र के बोरिंग सूख चुके हैं। माही से पानी लिफ्ट कर यहां आएगा। दरअसल, 15000 की आबादी वाला सीमलवाड़ा चौरासी विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां के विधायक राजकुमार रोत हैं, जो कांग्रेस-बीएपी गठबंधन के प्रत्याशी हैं। हालांकि थोड़े आगे मिले सुमेरा अहारी ने कहा कि इस बार लड़ाई सम्मान की है।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट पर सबसे अधिक असमंजस में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता ही नजर आ रहे हैं। डूंगरपुर के कई नेता ऐसे हैं, जिनका राजनीतिक वजूद ही बीएपी के खिलाफ है, लेकिन प्रदेश नेतृत्व के निर्देश में वे बंधे नजर आ रहे हैं। कहने को कार्यकर्ताओं की बैठक में वे भाग ले रहे हैं, बीएपी को समर्थन देने की बात कह रह हैं, लेकिन उन चेहरों के पीछे छिपे मोहरे कोई और चाल चलते नजर आए। हालांकि चर्चा के दौरान लोग यह साफ कहते दिखे कि नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस के कितने वोट बीएपी को मिलते हैं। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद डामोर अपने प्रचार में लगे हुए हैं। हालांकि उनके साथ कोई बड़ा चेहरा नहीं दिखता।
उदयपुर से डूंगरपुर और फिर वहां से सीमलवाड़ा होते हुए मांडली पहुंचा। यहां गुजरात पुलिस बैरियर लगाकर जांच करते हुए दिखी। बैरियर के इस तरफ राजस्थान का मांडली तो दूसरी तरफ गुजरात के साबरकांठा जिले का उंडवा गांव है। चेकपोस्ट से महज कुछ सौ मीटर दूर एक पेट्रोल पंप दिखा, जिस पर राजस्थान नंबर की गाड़ियां तेल भरा रही थीं। पेट्रोल पंप के कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन की औसत बिक्री करीब 3500 लीटर है, जिसमें से 3400 लीटर राजस्थान के लोग ले जाते हैं। हमें मौके पर ही एक केन में पेट्रोल भराते मिले युवक ने बताया कि गुजरात बॉर्डर से सटे डूंगरपुर जिले के पेट्रोल पंप लगभग बंद हो चुके हैं या फिर बंद होने की कगार पर हैं। 25 से 30 किलोमीटर तक के क्षेत्र के लोग यहीं से पेट्रोल ले जाते हैं। हालांकि डीजल के दाम में सिर्फ एक रुपए का अंतर है। गुजरात में उंडवा में पेट्रोल 95 रुपए 84 पैसे प्रति लीटर है।
इस सीट को भाजपा के रणनीतिकार भी फंसा हुआ मान रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सभा भी इसी कारण बांसवाड़ा जिले में कराई गई, लेकिन बांसवाड़ा से कांग्रेस विधायक अर्जुन राम बामणिया रोत का प्रचार जोरशोर से कर रहे हैं। गठबंधन में भी उनकी अहम भूमिका थी। इसी कारण भाजपा भी यहां पूरा जोर लगा रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के कनक मल कटारा ने सीट पर 3,05,464 मतों से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस प्रत्याशी ताराचंद भगोरा को 4,06,245, जबकि कटारा को 7,11,709 मत मिले थे। बीटीपी इस सीट पर तीसरे स्थान पर रही थी, उसके कांतिलाल रोत को 2,50,761 मत मिले थे। इस चुनाव में बीटीपी के अधिकांश नेता बीएपी में आ चुके हैं। बीएपी से राजकुमार रोत, भाजपा से महेंद्रजीत सिंह मालवीया मैदान में हैं।
Updated on:
23 Apr 2024 10:54 am
Published on:
23 Apr 2024 10:53 am
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