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Census 2027: पहले मकानों की गिनती, फिर लोगों की गणना… दो चरणों में होगी प्रक्रिया, 15 साल बाद डिजिटल सर्वे की शुरुआत

Census 2027: दुर्ग जिले में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार प्रक्रिया दो चरणों में पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी, जिसमें पहले मकानों का सूचीकरण और फिर व्यक्तियों की गणना की जाएगी।

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Census 2027: पहले मकानों की गिनती, फिर लोगों की गणना... दो चरणों में होगी प्रक्रिया, 15 साल बाद डिजिटल सर्वे की शुरुआत(photo-patrika)

Census 2027: पहले मकानों की गिनती, फिर लोगों की गणना... दो चरणों में होगी प्रक्रिया, 15 साल बाद डिजिटल सर्वे की शुरुआत(photo-patrika)

Census 2027: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आगामी जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। करीब 15 साल बाद होने वाली इस जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल रूप में आयोजित किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया को अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज बनाया जा सके। प्रशासन ने इसे दो चरणों में पूरा करने की योजना बनाई है।

Census 2027: दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया

जिला जनगणना अधिकारी एवं कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक आयोजित होगा, जिसमें मकानों का सूचीकरण किया जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें परिवारों और व्यक्तियों की विस्तृत गणना की जाएगी।

3850 प्रगणक और पर्यवेक्षक होंगे तैनात

इस बड़े अभियान के लिए जिले में कुल 3,850 प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। इनके मार्गदर्शन के लिए 79 फील्ड ट्रेनर तैनात किए गए हैं, जो पूरे सर्वेक्षण कार्य की निगरानी और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एक प्रगणक पर 800 तक लोगों की जिम्मेदारी

प्रत्येक प्रगणक को लगभग 700 से 800 लोगों या 250 से 300 परिवारों की गणना का दायित्व सौंपा गया है। यह जिम्मेदारी सुनिश्चित करेगी कि हर व्यक्ति और परिवार का डेटा व्यवस्थित तरीके से संकलित किया जा सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, अलग-अलग केंद्रों पर आयोजन

जनगणना कार्य के लिए 11 अप्रैल से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। इसमें 1109 प्रशिक्षकों को अलग-अलग बैच में तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण दुर्ग, रिसाली, भिलाई जोन-4, जामुल सहित धमधा, पाटन और अहिवारा तहसीलों में आयोजित किया जा रहा है।

मोबाइल ऐप से होगा डेटा संग्रह

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। प्रगणकों को मोबाइल एप के माध्यम से डेटा संग्रह, मैप सत्यापन और डेटा सिंकिंग की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। इससे डेटा की सटीकता बढ़ेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

सेल्फ-एन्यूमरेशन की भी सुविधा

नागरिकों को 16 से 30 अप्रैल तक स्वयं (सेल्फ-एन्यूमरेशन) अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी। इससे लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।

शिक्षकों की अहम भूमिका, कई विभाग शामिल

इस अभियान में शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, ट्राइबल और महिला-बाल विकास विभाग के कर्मचारी शामिल होंगे। इनमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जो जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कार्य को सफल बनाने में सहयोग करेंगे।

गोपनीय रहेगी जानकारी

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सरकारी नीतियों और योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा।

पारदर्शिता और सटीकता पर जोर

डिजिटल प्रणाली अपनाने से इस बार जनगणना अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित होने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि यह प्रक्रिया भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।