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BJP में गुटबाजी की हदें पार, रास नहीं आया मंत्री और विधायक का नाम तो 9 साल पुराने लोकार्पण पत्थर पर बदल दिया नाम

जिला संगठन पर वर्तमान में काबिज नेताओं ने अपना वर्चस्व दिखाने के लिए भाजपा कार्यालय में लगे नींव के पत्थर को ही बदल दिया।
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दुर्ग

•

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Dakshi Sahu

•

Jan 09, 2018

patrika

दुर्ग . जिला भाजपा में बरसों से चल रही गुटबाजी अब वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील हो गई है। इसका नजारा पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल के शहर आगमन पर दिखा। जिला संगठन पर वर्तमान में काबिज नेताओं ने अपना वर्चस्व दिखाने के लिए भाजपा कार्यालय में लगे नींव के पत्थर को ही बदल दिया। यह पत्थर जिला भाजपा कार्यालय के लोकार्पण के दौरान 9 साल पहले लगाया गया था।

जिस पर कार्यालय निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तात्कालिन जिला कार्यकारिणी के सदस्यों, मंत्री व विधायकों के नाम लिखे गए थे। मिशन 2018 की तैयारी के लिए जिला कार्यसमिति को रिचार्ज करने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल सोमवार को यहां पहुंचे थे। उनके आगमन की सूचना पर वर्तमान जिला कार्यकारिणी में काबिज नेता हरकत में आ गए और अपना वर्चस्व दिखाने की कवायद शुरू कर दी थी।

सबसे पहले कार्यालय की नींव रखने वाली कार्यकारिणी को दरकिनार किया गया। इसके लिए चार दिन पहले ही भवन लोकार्पण के दौरान लगाए गए पत्थर को ही बदल दिया गया। इस पत्थर पर तत्कालीन जिला भाजपा अध्यक्ष जागेश्वर साहू, महामंत्री चैनसूख भट्टड़ सहित अन्य पदाधिकारियों, मंत्री व विधायकों के नाम लिखे थे। इन नामों का पत्थर हटाकर वर्तमान में काबिज अध्यक्ष उषा टावरी सहित अन्य के नाम लिखवा दिया गया।

लाइब्रेरी का दूसरी बार उद्घाटन
राष्ट्रीय महामंत्री के सामने प्रदर्शन का यह आलम रहा कि जिस लाइब्रेरी को करीब डेढ़ साल पहले पार्टी के सहसंगठन महामंत्री सौदान सिंह ने उद्घाटन किया था, उसी का दोबारा उद्घाटन करा लिया गया। फर्क सिर्फ इतना रहा कि लाइब्रेरी को कम्प्यूटर लगाकर ई-लाइब्रेरी का नाम दे दिया गया। अध्यक्ष जिला भाजपा ऊषा टावरी ने बताया कि इसमें कोई नई बात नहीं है।

कार्यालयों में मौजूदा कार्यकारिणी का ही नाम लिखने का प्रावधान है। अन्य कार्यालयों में भी ऐसा ही है। चाहे तो आप देख सकते हैं। लोकार्पण के शिला से कोई भी नाम नहीं हटाया गया है। पूर्व महामंत्री जिला भाजपा, चैनसुख भट्टड़ ने बताया कि मैंने अभी देखा नहीं है, इसलिए कुछ नहीं कह पाउंगा, लेकिन ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। वैसे भी पत्थर पर नाम होना बड़ी बात नहीं है। हमारी संस्कृति काम करते रहने की है।