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इस खबर को आप भी जरूर पढ़ें, आखिर सवाल आपके भी बच्चे का है..

बच्चों को शोषण और हिंसा से बचाने के लिए सरपंच की अध्यक्षता वाली समिति का गठन किया गया है।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Jan 25, 2018

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दुर्ग . बच्चों की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी अब पंचायत स्तर की समितियों पर होगी। बच्चों को शोषण और हिंसा से बचाने के लिए सरपंच की अध्यक्षता वाली समिति का गठन किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कलस्टर तैयार कर समिति को कार्य कैसे करना है इसकी जानकारी दे रहे हैं। कई अपराध सार्वजनिक नहीं होता। शिकायत कहां करना है यह लोगों को मालूम नहीं होता।

जटिल कानूनी प्रक्रिया के कारण भी पीडि़त सामने नहीं आता। बाल अपराध से जुड़े मामले भी इसी तरह के हैं। शहरी क्षेत्र के प्रकरणों पर तो कार्रवाई हो भी जाती है,पर देहात क्षेत्र में शिकायतें दबा दी जाती है। बात गांव से बाहर ही नहीं आती। इसी तरह कि शिकायतों के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने पंचायत स्तर जिले में २९७ समितियों का गठन किया है।

कलेक्टर के निर्देश पर प्रशिक्षण भी
जिले में पंचायत स्तर पर समिति का गठन समय पर नहीं होने से कलक्टर उमेश अग्रवाल ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की खिचाई की थी। इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने समिति का गठन कर प्रशिक्षण देना शुरु कर दिया है। पंचायत स्तर पर बनी समिति में अध्यक्ष सरपंच होंगे। पंचायत सचिव समिति के सचिव होगें। समिति में तीन पंच, आंागनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानीन और हाईस्कूल की एक छात्रा को शामिल किया है।

समितियां इस पर रखेंगी नजर
कन्या भू्रण, बाल विवाह, बाल मजदूरी, बाल यौन शोषण, मानव व्यापार, शारीरिक सजा, जातीय भेदभाव, बच्चों की बलि देना। किसन लाल साहू, संरक्षण् अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि जिले में समिति का गठन हो चुका है। अब प्रचार प्रसार किया जा रहा । समिति के सदस्यों को प्रशिण देने ६७ क्लस्टर बनाया गया है। जिसमें २९७ पंचायत स्तर पर बनी समितियों के सदस्यों को शामिल किया गया है।

शोषण से पीडि़त बच्चे मिलने पर यह करें
१. बच्चे से बात करने का प्रयास किया जाएगा। उन्हे स्वस्थ्य माहौल में रखना सुनिश्चित किया जाएगा। २. पीडि़त बच्चों के परिजनों से चर्चा कर उन्हें समझाया जाएगा कि बच्चों के अधिकार होते हैं। माता पिता की जवाबदारी है अपने बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करना।
३. समिति बच्चे और परविार की आवश्यकतानुसार सहायता करेंगे।
४. बच्चे पर किसी तरह का खतरा तो नहीं इसका पता लगाएगे।
५. बच्चे की प्रति क्रू रता करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई क रेंगे।
६. बालक कल्याण समिति,चाइल्ड लाइन की मदद से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।