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कोर्ट के समय का रखा ध्यान, खुश होकर जज ने दिया एएसआई को एक दिन का वेतन ईनाम

न्यायाधीश स्मिता रत्नावत ने समय की कीमत को समझाने बचाव पक्ष के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि विवेचना अधिकारी को एक दिन का वेतन तत्काल प्रदान करे।
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दुर्ग

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Dakshi Sahu

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Updated: 23 Nov 2017, 3:38 PM IST

Durg

दुर्ग . आमतौर पर गवाही सुनवाई में पुलिस वाले नदारद रहते है। उपस्थित नहीं होने से न्यायालय कार्यवाही को स्थगित कर देती है। गुरुवार को छावनी थाना के विचाराधीन प्रकरण के जांच करने वाले अधिकारी सब इंस्पेक्टर बीपी गुप्ता उपस्थित हुए। सुनवाई में आरोपी गण अनुपस्थित रहे। आरोपियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश स्मिता रत्नावत ने समय की कीमत को समझाने बचाव पक्ष के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि विवेचना अधिकारी को एक दिन का वेतन तत्काल प्रदान करे।

न्यायाधीश ने सुनवाई में कहा कि वर्ष 2017 का अंतिम माह चल रहा है। ऐसे समय पर पुलिस पर दबाव रहता है। पेडिंग प्रकरणों का निराकरण कर अभियोग पत्र प्रस्तुत करने के लिए वे रतजगा करते हैं। साल के अंतिम माह में उन्हे अतिरिक्त समय निकालना मुश्किल रहता है। ऐसी स्थिति में प्रकरण के विवेचना अधिकारी घंटो से न्यायालय में घंड़े है और आरोपी गण अनुपस्थित है। इस प्रकरण में बचाव पक्ष के मुख्य अधिवक्ता भी अनुपस्थित है। न्यायाधीश स्मिता रत्नावत ने इसे गंभीरता से लेते हुए बचाव पक्ष की ओर उपस्थित जूनियर अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे विवेचना अधिकारी को एक दिन का वेतन दे।

एक दिन का वेतन 700 रुपए दिलाया
विवेचना सही नहीं होने, आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित नहीं कराने या किसी तरह की त्रुटि होने पर न्यायालय पुलिस को फटकार लगाती है। कड़े शब्दो का उपयोग करती है, लेकिन न्यायालय ने आज बचाव पक्ष के अधिवक्ता को पुलिस की व्यवस्ता का उदाहण दिया और एक दिन का वेतन 700 रुपए दिलाया। न्यायालय की प्रशांसा पाने से सब इंस्पेक्टर बीपी गुप्ता का सिना चौड़ा हो गया था।

सब इंस्पेक्टर वर्तमान में दुर्ग कोतवाली में
सब इंस्पेक्टर वर्तमान में दुर्ग कोतवाली में पदस्थ है। न्यायालय के इस फैसले पर सब इंस्पेक्टर बेहद खुश थे। उन्होंने तत्काल सिटी कोतवाली भावेश साव को इस आशय की सूचना दी। टीआई ने भी स्टाफ को बुलाकर निर्देश दिया कि वे समय में काम करे। अगर समय में काम किया जाए तो इसी तरह का ईनाम मिलता है।

यह है मामला
प्रकरण वर्ष 2006 का है। आरोपी मालती साहनी अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर पड़ोसी के घर बलात प्रवेश किया था। गलौच गलौच कर मारपीट किया था। साथ ही घर में रखे सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। घटना की सूचना मिलते ही बीपी शर्मा घटना स्थल पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ बलवा का अपराध दर्ज किया। वर्तमान में यह प्रकरण सीजेएम न्यायालय में विचाराधीन है।