
दुर्ग . जिस सामान्य सभा को कराने के लिए नियमों की दुहाई दी गई और प्रशासन से लेकर शासन तक से गुहार लगाई गई, बुधवार को उसकी बैठक में शहर के मुद्दे एक बार फिर पीछू छूट गए। निगम ने बैठक के लिए 6 एजेंडा भी रखे थे, लेकिन पूरे दिन चर्चा के बाद भी किसी भी मुद्दे पर ठोस निर्णय नहीं हो पाया। सदन की शुरूआत से ही पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोक चल रही थी कि दोपहर ढाई बजे एल्डरमैन प्रतीक उमरे की बेतुकी हरकत से सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया।
उमरे भोजन की थाली लेकर सदन में पहुंच गए। बाकायदा कुर्र्सी पर बैठकर खाना खाने लगे। सभापति ने टोका तब भी नहीं माने। इसके बाद कांग्रेस पार्षद आपत्ति के लिए उठ खड़े हुए। दस मिनट की बहस के बाद सभापति ने एल्डरमैन की बर्खास्तगी का प्रस्ताव रख दिया। तब जाकर एल्डरमैन सदन से बाहर निकले। बाद में दोबारा सत्र शुरू हुआ तब एल्डरमैन ने आकर माफी मांगी। उनकी बर्खास्तगी का प्रस्ताव तो वापस ले लिया गया, लेकिन इस बीच डॉग हाउस निर्माण की अनियमितता पर जांच समिति की रिपोर्ट को लेकर बात अटक गई।
हंगामा खत्म होने के बाद उस पर चर्चा आगे बढ़ी। इसके अलावा दुकानों के लीज नवीनीकरण पर फैसला हुआ। सदन में शंकर नाला प्रोजेक्ट पर जमकर बहस हुई। आपत्तियों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच इस मसले पर चर्चा अधूरी रह गई। समय समाप्त हो जाने से सदन को 20 दिसंबर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
मैं बीमार हूं डॉक्टर ने समय पर खाने खाने की दी सलाह
सदन की चर्चा के बीच थाली लेकर खाना खाते एल्डरमैन उमरे के आचरण को अमर्यादित मानते हुए उनकी बर्खास्तगी का प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद उमरे ने सदन से माफी मांग ली। उनका कहना था कि मैं बीमार हूं, डॉक्टर ने समय पर खाना खाने की सलाह दी है। भोजन में देरी हो रही थी, इसलिए थाली लेकर आ गया। उनके इस रवैए से सदन का आधा घंटे से अधिक समय खराब हुआ। सदन समाप्ति के बाद पत्रिका ने एल्डरमैन से पूछा कि सदन की गरिमा का उल्लंघन करने वाला आचरण क्यों किया?
यह दिया जवाब
मैं नया हूं, सदन के नियमों का ज्ञान नहीं था। वैसे भी सदन के भीतर चाय व बिस्किट परोसा जा रहा था। इसलिए मुझे यह आपत्तिजनक नहीं लगा। चूंकि भोजन वाली जगह पर चेयर नहीं दी, इसलिए मैं खाना लेकर अंदर आ गया था। इसमें सदन की अवमानना की नीयत नहीं थी। मेरे दाहिने पैर के घुटने में तकलीफ है। मेरा इलाज कर रहे डॉ. बघेल ने ज्यादा देर खड़ा नहीं होने व समय पर खाना व दवाई खा लेने की सलाह दी है।
मेयर चंद्रिका चंद्राकर ने कहा कि निश्चित तौर पर यह व्यवहार सदन की गरिमा के विपरीत थी। इसके लिए एल्डरमैन को चेतावनी भी दी गई है। उन्होंने सदन में सबके सामने क्षमा याचना भी की है। सभी सदस्यों को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। रहा सवाल विकास का प्रस्तावों का तो सदन में जनप्रतिनिधियों के बीच इस पर चर्चा जरूरी है। सभापति राजकुमार नारायणी ने बताया कि एल्डरमैन का व्यवहार अनुचित था।
इसलिए उन्हें सदन से निलंबित कर बर्खास्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय किया गया था। बाद में उन्होंने बीमार होने की जानकारी दी व सदन से क्षमा याचना भी की। इस पर निलंबन व बर्खास्तगी के प्रस्ताव का निर्णय वापस ले लिया गया। इसका अधिकार मुझे है। नेता प्रतिपक्ष लिखन साहू ने बताया कि एल्डरमैन ने सदन की मर्यादा को खंडित किया था, भले ही अज्ञानता में हो। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई उचित था। ऐसे मामलों में निर्णय का अधिकार सभापति का है।
28 पार्षदों के 55 सवाल, 6 ने पूछे, एक गायब
सामान्य सभा में विधानसभा की तर्ज पर प्रश्नकाल के लिए 28 पार्षदों ने कुल 55 सवाल रखे थे, लेकिन एक घंटे के प्रश्नकाल में केवल ७ सदस्यों को ही सवाल पूछने का मौका मिला। इनमें से भी एक सदस्य ज्ञानेश्वर ताम्रकार प्रश्नकाल से गायब रहे। सदन में कुलेश्वर ताम्रकार, लीलाधर पाल, भोला महोबिया, अरुण यादव, आशीष दुबे, शंकर दमाहे ने सवाल पूछे। शंकर दमाहे नाम पुकारे जाने के समय अनुपस्थित रहे, लेकिन उन्हें प्रश्नकाल के दौरान आ जाने के कारण मौका दिया गया।
एजेंडे के अलावा लोक महत्व के सवालों पर भी चर्चा किया जाना था। इसके अलावा कांग्रेसी पार्षदों ने विशेष सभा के लिए प्रस्तावित निगम के कंाजी हौस में गायों की मौत, शराब दुकान, अवैध होर्डिंग्स, सफाई व निराश्रित पेंशन पर भी सत्तापक्ष को घेरने की रणनीति बनाई थी, लेकिन इससे जुड़े सवाल भी नहीं पूछे जा सके।
सदन में कांग्रेस पार्षद प्रकाश गीते ने अपनी बात रखने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। वे मुंह में मास्क लगाकर सामान्य सभा में पहुंचे। दरअसल वे शहर की सफाई व्यवस्था, प्रदूषण और धूल पर सदन का ध्यान आकृष्ट कराना चाहते थे। उन्होंने एजेंडे पर चर्चाके दौरान सदन में बात भी उठाई।
प्रश्नकाल से लेकर एजेंडे तक नोकझोक
प्रश्नकाल से लेकर एजेंडे तक पक्ष-विपक्ष के पार्षद उलझते रहे। प्रश्नकाल में पाइप लाइन विस्तार पर बघेरा के पार्षद अरुण यादव और प्रभारी देवनारायण चंद्राकर उलझ गए। यूजर चार्ज पर भी आशीष दुबे और प्रभारी शिवेन्द्र परिहार में नोक झोक हुई। वहीं डॉग हाउस की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष लिखन साहू और प्रभारी शिवेन्द्र परिहार आमने-सामने हो गए। यह विवाद करीब 15 मिनट चला। अंत में शंकरनाला के मुद्दे पर पार्षद अब्दुल गनी, राजेश शर्मा व ज्ञानेश्वर ताम्रकार और प्रभारी दिनेश देवांगन के बीच नोकझोक चलती रही।
Published on:
14 Dec 2017 10:10 am
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