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जल जीवन मिशन – टंकियों की मरम्मत में घालमेल की जांच, फिजूलखर्ची पर साधी जिम्मेदारों ने चुप्पी

जल जीवन मिशन में गड़बडिय़ों का लगातार खुलासा हो रहा है। इस क्रम में पूर्व में डीएमएफ फंड से टंकियों की मरम्मत में गड़बड़ी के साथ पाइप लाइन और नए नल कनेक्शन के नाम पर फिजूलखर्ची का भी खुलासा हो चुका है। इधर जिला पंचायत के हस्तक्षेप के बाद टंकियों की मरम्मत में गड़बड़ी की तो जांच कराई जा रही है, लेकिन जिम्मेदारों ने फिजूलखर्ची के मामले में चुप्पी साध ली है। जिला पंचायत सदस्य भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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जल जीवन मिशन - टंकियों की मरम्मत में घालमेल की जांच, फिजूलखर्ची पर साधी जिम्मेदारों ने चुप्पी

रेट्रोफिटिंग के नाम पर बदले जा रहे जबरिया पाइप लाइन, पुराने कनेक्शनधारियों को नए कलेक्शन के लिए किया जा रहा मजबूर

गौरतलब है कि जिले के 203 गांवों में पहले से ही नल जल योजना संचालित है। यहां करोड़ों खर्च कर पेयजल सप्लाई का स्ट्रक्चर तैयार किया गया है। इनमें से अधिकतर स्ट्रक्चर से अब तक पानी की सप्लाई हो रहा था, लेकिन अब मिशन के नाम पर इन गांवों में पुराने स्ट्रक्चर की जगह फिर से करोड़ों खर्च कर नई पाइप लाइन डाला जा रहा है। इतना ही नहीं पहले से ही जिन घरों मे नल कनेक्शन हैं, उन्हें भी नए सिरे से कनेक्शन लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इससे न सिर्फ सरकारी धन का दुरूपयोग हो रहा है बल्कि लोगों को भी आर्थिक चोट पहुंचाई जा रही है।


ऐसे समझें फिजूलखर्ची को
प्रोजेक्ट के तहत नए एकल व समूह नलजल योजना के साथ पुराने योजनाओं में सुधार के काम किए जाने हैं। इसके विपरीत पुराने योजनाओं में सुधार के के बजाए पहले से मौजूद स्ट्रक्चर की जगह नए सिरे से पाइप लाइन बिझाने का काम किया जा रहा है। इससे पहले से बिछी पुरानी पाइप लाइन अनुपयोगी हो जाएगी। अधिकतर पुराने सिस्टम में लोहे व सीमेंट की पाइप लाइन बिछाई गई है, जो कि बेहद मजबूत और लंबे समय टिकाउ होता है।


कनेक्शनधारियों को भी चोट
पुराने नल जल योजना के तहत घरों को भी नल कनेक्शन दिए गए हैं। लोगों ने पहले ही हजारों रुपए खर्च कर नल का कनेक्शन लिए हैं। अब ऐसे कनेक्शनधारियों को भी नए नल कनेक्शन के लिए बाध्य किया जा रहा है। इससे पुराने कनेक्शन के सामान बेकार हो जाएंगे। वहीं बने-बनाए मकानों को तोडफ़ोड़ की स्थिति अलग बन रही है।


अच्छे सिस्टम को भी बता दिया कंडम
जिन पेयजल योजनाओं की डिजाईन पीरियड पूर्ण हो चुकी है। इन्हें नए कनेक्शन देने के लिए रेट्रोफिटिंग किया जाना है। इसके तहत पाइप लाइन विस्तार, जरूरत अनुसार टंकी निर्माण किया जाना है। बताया जा रहा है कि रेट्रोफिटिंग ने नाम पर अच्छी व चालू सिस्टम को भी कंडम बता दिया गया है, वहीं नए इलाकों में पाइप लाइन विस्तार के बजाए पुराने जगहों पर ही पाइप बिछाई जा रही है।


क्वालिटी भी सवालों में
मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे कामों के गुणवत्ता व पारदर्शिता को लेकर पहले ही बवाल हो चुका है। जिला पंचायत की सामान्य सभा में निर्माण के एग्रीमेंट में पंचायतों को पक्षकार बनाए जाने के बाद भी स्टीमेट की कापी उपलब्ध नहीं कराने व निर्माण स्थल पर नियमानुसार कार्य के विवरण संबंधी सूचना बोर्ड भी नहीं लगाने के आरोप है।