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देखिए मंत्री जी, रेडी टू इट की आड़ में 20 लाख का घोटाला, बच्चों की खुराक भी खा गए घोटालेबाज

महिला एवं बाल विकास विभाग की रेडी टू ईट योजना को भी घोटालेबाजों ने नहीं बख्शा।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

May 27, 2018

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देखिए मंत्री जी, रेडी टू इट की आड़ में 20 लाख का घोटाला, बच्चों की खुराक भी खा गए घोटालेबाज

मुकेश देशमुख@भिलाई. महिला एवं बाल विकास विभाग की रेडी टू ईट योजना को भी घोटालेबाजों ने नहीं बख्शा। मासूम बच्चों और कुपोषितों को पोषक आहार देने की इस योजना के नाम पर करीब 20 लाख रुपए डकार लिए गए। भ्रष्टाचार का यह कारनामा बड़े दिलचस्प तरीके से अंजाम दिया गया। योजना के अंतर्गत नागरिक आपूर्ति निगम ने जितना गेहंू दिया, उससे मुकाबले कहीं अधिक रेडी टू ईट तैयार कर दिया गया। इस अतिरिक्त रेडी टू ईट की आड़ में भुगतान ले लिया गया।

आंगनबाड़ी केंद्रों में तैयार भोजन (पूरक पोषण आहार) देने की योजना में यह गड़बड़ी पिछले दो वर्षों में की गई। यह गड़बड़ी एक परियोजना में सामने आई है जबकि जिले में तीन परियोजनाएं संचालित हैं। बता दें कि योजना के अंतर्गत स्वसहायता समूहों को सरकार नि:शुल्क गेहूं उपलब्ध कराती है। पूरक पोषण आहार तैयार करने के लिए पहले आवंटन भेजा जाता है। इसके आधार पर राशन दुकान से गेहूं की आपूर्ति की जाती है, इससे समूह रेडी टू ईट तैयार करते हैं।

कम गेहूं से ज्यादा भोजन बना दिया
वर्ष 2016-17 में 1498 क्विंटल गेहूं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने दुर्ग शहर परियोजना को रेडी टू ईट बनाने जारी किया था। शहर के अलग-अलग सेक्टर में संचालित स्व सहायता समूहों ने आवंटित गेहूं के मुकाबले 80 क्ंिवटल अधिक रेडी टू ईट तैयार कर दिया। इसे विभाग में जमा करके भुगतान भी ले लिया। इसी तरह २०१७ -१८ में ११५४ क्ंिवटल गेहूं से रेटू टी ईट तैयार करना था लेकिन स्वसहायता समूहों को ३२५ क्ंिवटल अधिक गेहूं से तैयार रेडी टू ईट का भुगतान किया गया है।

यह बनाते हैं रेडी टू ईट
सीता ममत्व (डिपरा पारा), एस्तर दास (सा.स तितुरडीह), सामु विकास समिति (शक्तिनगर), साई महिला समिति (कसारीडीह), सखी सहेली महिला समित, सफल महिला समूह, माता जननी स्वं सहायता समूह

पत्रिका ने पड़ताल की तो खुली घोटाले की परतें
थ्री स्टार होटल में प्रशिक्षण शिविर में अनियमितता और केशलैस के स्थान पर नगद भुगतान के मामले में प्रधान मंत्री कार्यालय को शिकायत की गई है। इसकी जांच महिला एवं बाल विकास की कार्यक्रम अधिकारी गुरप्रीत कौर स्वयं कर रही हैं। शिकायत पत्र में ही अनुपात से अधिक गेहंू खपत किए जाने का जिक्र है। पत्रिका ने इस गड़बड़ी की सचाई जानने के लिए पड़ताल की। इसमें खुलासा हुआ कि गेहूं की आड़ में यहां बड़ा खेल चल रहा है। कम गेहूं आपूर्ति होने के बाद स्व सहायता समूह अधिक गेहू से रेडी टू ईट का भुगतान ले लिया है।

ऋणात्मक स्थिति में पहुंचा रिकॉर्ड
दुर्ग परियोजना में २०१६-१७ के पहले गेहंू का स्टाक अधिक था। अधिकारियों का कहना है कि रेडी टू ईट बनाने स्व सहायता समूहों पर नियंत्रण नहीं होने के कारण स्थिति गिरते गई। वर्तमान में गेहू का स्टॉक ऋणात्मक में होना बताया जा रहा है। जो अपने आप में एक जांच का विषय है। भुगतान करने में लापरवाही बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक नियमत: 1.5 लाख से अधिक बनने वाले समूहों के बिल का भुगतान जिला कार्यक्रम अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर के पास भेजा जाता है, लेकिन इस नियम को दरकिनार कर जानबूझकर राशि को कम कर चेक काट किस्तों में भुगतान किया जाता है जो जांच का विषय हैं।

नि:शुल्क गेहूं के देने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग प्रति किलो रेडी टू ईट 26.86 रुपए के हिसाब से भुगतान करता है। परियोजना अधिकारी नीरू सिंह ने बताया कि अनुपात से अधिक गेहूं खपत करने का मामले की जानकारी है। इसे गंभीरता से लेते हुए हम स्टॉक मिलान करवा रहे हैं। रजिस्टर व डिमांड क ा मिलान किया जा रहा है। दरअसल डिमांड पर्यवेक्षक द्वारा तैयार की जाती है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।