
दुर्ग . मातृछाया में रहने वाले 9 अनाथ मासूम बच्चों की किलकारी उन घरों में गूंज रही हैं, जिन्होंने इन मसूमों को गले से लगाया है। इन मासूमों को जन्म देने वालों ने तो लावारिस हालत में बिलखते छोड़ दिया था। इन्हें मातृछाया में आश्रय मिला था। अब ये बच्चे गोद लेने वाले माता-पिता की गोद में खेल रहे हैं।
मातृछाया प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार इस साल 9 बच्चों को नि:संतान दंपतियों ने गोद लिया है। जिनमें एक विदेशी दंपती भी शामिल है। वर्ष २०१३ से बोरसी में संचालित मातृछाया में अब तक शून्य से ६ वर्ष तक के ३१ बच्चों को गोदनामा में दिया जा चुका है। जिनमें २० लड़की है और ११ लड़के शामिल है।
यूएसए में गूंज रही एक बच्ची की किलकारी
यहां का एक बच्चा विदेश में पल रहा है। जिसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय संस्था कारा कर रही है। एक और बच्ची को विदेशी नागरिक ने गोदनामा लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। यह आवेदन अभी प्रक्रियाधीन है। इनके अलावा दुर्ग-भिलाई के १५ दंपतियों ने यहां रह रहे अनाथ बच्चों को अपना दिया है। इसके अलावा राजनांदगांव के तीन, बालोद के दो, बिलासपुर व महाराष्ट्र के एक-एक, तेलंगाना के दो, दक्षिण भारत के तीन, पश्चिम बंगाल, गुजरात व रायपुर के एक-एक दंपती ने भी मासूमों को अपनाया है।
जाने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
१. दत्तक ग्रहण एजेंसी का अपनी वेबसाइड है जिसमें सबसे पहले अवादेन प्रस्तुत करना होता है।
२. आवेदन के साथ ही गोद लेने वाले दंपती को आय, जन्म तिथि, विवाह प्रमाण पत्र, मेडिकल प्रमाण पत्र, संपत्ति का विवरण, आधार कार्ड, पेन कार्ड के साथ फोटो संलग्न करना होता है।
३. आवेदन के आधार पर ही ऑनलाइन बच्चों को दिखाया जाता है।
४. इसके बाद उन्हें बच्चों को रिजर्व करने ४८ घंटे का समय दिया
जाता है।
५. प्रक्रिया पूरी करने के बाद फास्टर केयर के तहत दो माह पहले बच्चों को आवेदक को सौंपा जाता है।
६. इस दौरान समिति के सदस्य मॉनिटरिंग करते हैं।
७. संतुष्ट होने पर न्यायालय के माध्यम से बच्चे को गोदनामा में दिया जाता है।
बोरीगारका और कुम्हारी में मिले बच्चे
मातृछाया में अब आठ मासूमों को गोद का इंतजार है। इसमें से पांच नवजात है। तीन बच्चे दो से तीन वर्ष के हैं। इन बच्चों में हाल ही में बोरीगारका और कुम्हारी में मिले बच्चे भी शामिल है। सभी बच्चे स्वस्थ्य है।
किराए के अशियाने में देते मासूमों को 'छाया
मातृछाया के संचालन के लिए समिति गठित है। सेवा भारती के माध्यम से अध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. सुधीर हिशीकर को दी गई है। सचिव दिलीप देशमुख, उपाध्यक्ष प्रमोद बाघ, गायत्री साहू व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व योगेश साहू हैं। वतर्मान में यह संस्था किराए के भवन में संचालित है। अनाथों को संरक्षण देने और उनको बेहतर जीवन देने गोदनामा में देने वाले संस्था के पास अपना स्वयं का भवननहीं हैं।
Published on:
30 Dec 2017 10:55 am
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