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सरकार की जय हो: गरीब चाय वाले को चावल वाले बाबा की संजीवनी पड़ गई भारी, RTI में खुला बड़ा राज

मुख्यमंत्री संजीवनी कोष से शहर का निषाद परिवार को सहायता तो नहीं मिली बल्कि सहायता के लिए मंत्रालय का चक्कर लगाते परिवार कर्जदार जरूर हो गया।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Sep 06, 2018

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सरकार की जय हो: गरीब चाय वाले को चावल वाले बाबा की संजीवनी पड़ गई भारी, RTI में खुला बड़ा राज

दुर्ग. मुख्यमंत्री संजीवनी कोष से शहर का निषाद परिवार को सहायता तो नहीं मिली बल्कि सहायता के लिए मंत्रालय का चक्कर लगाते परिवार कर्जदार जरूर हो गया। गिरने से सिर पर आई गंभीर चोट के ऑपरेशन का बिल चुकाने से लेकर मंत्रालय के चक्कर लगाने के बाद इस परिवार की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।

सिस्टम से परेशान होने के बाद जब सूचना का अधिकार के तहत आवेदन लगाया तो चाय बेचने वाला यह परिवार हतप्रभ रह गया। नौ माह बाद पीडि़त परिवार को जानकारी हुई कि जिस मदद के लिए वह चक्कर लगा रहा है उसका आवेदन अपात्र की श्रेणी में है। आवेदन निरस्त होने का कारण भी अलग-अलग बताया गया है।

बैजनाथ पारा निवासी आनंद निषाद ने बताया कि उन्होंने ऑपरेशन के बाद २ फरवरी 2018 को संजीवनी सहायता कोष के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। जिला अस्पताल से आवेदन लेने के बाद हाथों हाथ सिविल सर्जन से अग्रेषित कराकर वह कलेक्टरोट पहुंचा और औपचारिकताएं पूरी कर पूरे दस्तावेज को संलग्न कर संचानालय में शाम 4.30 बजे जमा किया।

अधिकारियों ने आवेदन की जांच कर कहा था कि कुछ दिन में उसका आवेदन स्वीकृत हो जाएगा। जबकि उसके आवेदन का निराकरण आज तक नही हुआ। पीडि़त हर माह आवेदन प्रस्तुत करता और पावती लेता। इसके बाद भी प्रकरण की स्थिति का जानकारी नहीं मिली। सूचना का अधिकार लगाने के बाद पीडि़त को जानकारी दी गई कि उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया है।

सूचना के अधिकार में मिला तीन अलग-अलग जवाब
संजीवनी कोष से मदद नहीं मिलने पर पीडि़त ने वास्तविकता जानने के लिए संचालनालय संजीवनी कोष के अलग अलग शाखा में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन लगाया। विभाग के अधिकारियों ने जो जानकारी दी उसमें भी एकरुपता नहीं है।

जाने किस तरह परेशान किया गया
१. २२ फरवरी 2018 को संचालनालय के अधिकारियों ने सूचना दी कि मूल प्रति की जगह सारे दस्तावेज प्रतिलिपि है। सारे दस्तावेज को दोबारा जमा करना होगा। जबकि संचालनालय में मूल प्रति ही जमा किया गया था।
२. मंत्रालय में फाइल को विलंब से भेजा गया। शपथ पत्र व अन्य आवेदन को जमा करने गवाह के तौर पर पीडि़त ने वही के सुरक्षाकर्मी को प्रस्तुत किया। इसके बाद भी अधिकारियों ने विश्वास नहीं किया।

जवाब-1
आंनद निषाद द्वारा प्रस्तुत आवेदन को निरस्त किया गया है। आवेदन में बीपीएल संबंधी दस्तावेज नहीं है। जिस बीमारी के लिए अनुदान मांगा गया है उसे योजना में शामिल नहीं किया गया है।
जवाब-२- जिस अस्पताल में मरीज का ऑपरेशन किया गया है वह अनुबंधित अस्पताल नहीं है। इसलिए प्रकरण को निरस्त किया गया है।
जवाब-३ - प्रकरण में मरीज का ऑपरेशन 28 दिसंबर को किया गया है। आवेदन ऑपरेशन के बाद प्रस्तुत किया गया है इसलिए प्रकरण को निरस्त किया गया।

यह है प्रकरण
बैजनाथ पारा निवासी पेशे से चाय की गुमटी लगाने वाले आंनद निषाद ने बताया कि उसका भाई अनिल निषाद (32 वर्ष) साइकिल से 25 दिसंबर 2017 को गिर गया था। सिर पर गंभीर चोट आई थी। खून का थक्का जमने से डॉक्टरों ने जान बचाने ऑपरेशन का सुझाव दिया था। पीडि़त परिवार ने जैसे तैसे ऑपरेशन कराने का साहस जुटाया। उसे बीएम शाह अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने भी मदद की।

ऑपरेशन के बाद रुपए जमा करने की मोहलत दी। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने जीवन भर की जमा पूंजी और कर्ज लेकर परिवार के सदस्य अस्पताल का बिल जमा किए और यह सोचे कि संजीवनी कोष से राहत मिलने के बाद उनकी स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

अब जनहित याचिका
अधिवक्ता सौरभ चौबे ने बताया कि इस प्रकरण को आधार बनाकर जनहित याचिका हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। आंनद निषाद के प्रकरण में सारी औपचारिकताएं पूरी की गई थी। नियमों को शिथिल कर प्रकरण को स्वीकृत का प्रवधान है। इस प्रकरण में नियमों को शिथिल करने की अनुशंसा की गई है।

आवेदन निरस्त करने का अभिमत भी अलग अलग है। इसी प्रकरण के संबंध में हमने सूचना का अधिकार के तहत तीन माह में स्वीकृत प्रकरण की जानकारी मांगी थी। जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया था किस-किस बीमारी के तहत और कितनी राशि किस मरीज के नाम से स्वीकृत कराया गया उसकी जानकारी दे। इसके बाद भी विभाग ने गोल मोल जवाब दिया।