ब्याज पर ब्याज मामले में एक हफ्ते में केंद्र सरकार को करना होगा स्टैंड क्लीयर

  • Supreme Court ने Loan Moratorium मसले पर केंद्र को लगाई फटकार, कहा, नहीं बच सकते हैं जिम्मेदारी से
  • सु्प्रीम कोर्ट ने कहा, ब्याज वसूलने या नहीं वसूलने का गंभीर फैसला RBI पर नहीं छोड़ा जा सकता

By: Saurabh Sharma

Published: 26 Aug 2020, 01:36 PM IST

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ( reserve bank of india ) और केंद्र सरकार के लोन मोराटोरियम ( Loan Moratorium ) के दौरान ईएमआई में राहत के बाद ब्याज पर ब्याज वसूल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) काफी सख्त हो गया हैं। कोर्ट ने केंंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि इतना गंभीर मामला सिर्फ आरबीआई पर नहीं छोड़ा जा सकता है। सरकार को अब एक हफ्ते के अंदर इस पूरे मामले में शपथ पत्र के माध्यम से अपना स्टैंड क्लीयर करने का आदेश दिया गया है। अब अगली सुनवाई एक सितंबर होगी।

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नहीं छोड़ सकते आरबीआई पर सबकुछ
सुप्रीम कोर्ट ने केंंद्र सरकार से साफ कहा कि इतना गंभीर फैसला आरबीआई पर नहीं छोड़ा जा सकता है। इसके लिए सरकार को सामने आना ही होगा। केंद्र सरकार इस मुद्दे पर आरबीआई के फैसले की आड़ नहीं ले सकती है। केंद्र इस मामले में आपदा प्रबंधन कानून के तहत अधिकारों का प्रयोग कर लोगों को टाली हुई लोन ईएमआई पर ब्याज को माफ कर सकती है। लॉकडाउन की वजह से भयानक हुए हालातों में ब्याज वसूलने या नहीं वसूलने के फैसले को आरबीआई पर छोडऩार ठीक नहीं है।

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केंद्र की सफाई
केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि केंद्र सरकार लोन लेने वालों को मुश्किलों निकालने में आरबीआई के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि सरकार और आरबीआई का नजरिया अलग नहीं हो सकता है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र से एक सप्ताह में शपथ देकर लोन मोरेटोरियम के मसले पर अपना स्टैंड क्लियर करने को कहा है। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा सरकार को अपना पक्ष एकदम साफ रखना चाहिए।

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क्या है ब्याज पर ब्याज का मामला
रिजर्व बैंक ने लॉकडाउन में बेरोजगारों को राहत देने के लिए ईएमआई में 31 अगस्त की राहत दी है। वैसे इस दौरान कस्मर्स से सामान्य दर से ब्याज वसूलने की भी अनुमति बैंकों को मिली हुई है। जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लोन मोराटोरियम के दौरान ब्याज माफ किए जाने की मांग रखी गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार भारत सरकार की ओर से सुनवाई को बार-बार टालने की मांग की जा रही है, अभी तक कोई भी हलफनामा नहीं दाखिल किया गया है। आरबीआई और एसबीआई दोनों मौन हैं।

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