
नई दिल्ली। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने देश की मोदी सरकार को बड़ा झटका देते हुए वित्त वर्ष 2019-20 के लिए आर्थिक वृद्घि दर के अनुमान को 6.9 से घटाकर 6.3 फीसदी कर दिया है। एजेंसी के अनुसार देश में जिस तरह की आर्थिक मंदी देखने को मिल रही है आने वाले दिनों में और भी गहरा सकती है। सरकार की ओर जारी आंकड़ों के अनुसार देश की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्घि दर महज 5 फीसदी रह गई है। जो सरकार के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। आपको बता दें कि सरकार और खुद उपराष्ट्रपति वैंकया नायडु कह रहे हैं कि देश में मंदी अस्थाई हैै। साथ ही 2024 तक देश 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।
एजेंसी ने जारी किया नोट
एजेंसी ने एक नोट जारी करते हुए कहा कि यह जो अनुमान लगाया है, वो दूसरी तिमाही से मांग बढऩे और तिमाही खत्म होने तक इसी रफ्तार के साथ अर्थव्यवस्था रहने के अनुसार है। क्रिसिल नोट के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में तुलनात्मक आधार प्रभाव कमजोर रहने के चलते वृद्धि दर में हल्के सुधार 6.3 फीसदी के आसार हैं। वहीं मौद्रिक नीति और उसके अनुरूप बैंकों के तेजी से क्रियान्वयन, न्यूनतम आय सहायता योजना से किसानों की ओर मांग बढऩे आदि के चलते भी आर्थिक वृद्धि में फिर से तेजी आने की उम्मीद है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या
दुनियाभर की रेटिंग एजेंसिया भारत की आर्थिक वृद्घि के अनुमान को लगातार घटा रहे हैं। जिसकी असल वजह देश में आर्थिक मंदी है। ताज्जुब की बात तो ये है कि सरकार द्वारा कई उपाय करने के बाद भी इस मंदी से निपट नहीं पा रही है। वहीं आरबीआई की ओर से भी ब्याज दरों में कटौती कर रहा है। इसके बाद भी देश में डिमांड नहीं बढ़ रही है। मैन्युफेक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर तक सभी मंदी के चपेट में दिखाई दे रहे हैं।
Published on:
05 Sept 2019 10:57 am
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