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नवंबर के महीने में विदेशी निवेशकों ने 50 हजार करोड़ रुपए का किया निवेश

20 नवंबर तक के जारी हुए आंकड़े, अभी और बढ़ सकता है निवेश का रुपया अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की ओर से 22 हजार करोड़ का हुआ था निवेश

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Foreign investors invested Rs 50000 crore in month of November 2020

Foreign investors invested Rs 50000 crore in month of November 2020

नई दिल्ली। नवंबर का महीना भारत का प्रत्येक लिहाज से काफी अच्छा रहा है। जहां एक ओर इक्विटी मार्केट में तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर भारत के पीएमआई आंकड़े भी अच्छे आए। वहीं भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी इजाफा हुआ। सवाल यह है कि आखिर विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा होता कैसे है? वास्तव में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की ओर से किए जाने वाले निवेश की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा इजाफा देखने को मिलते हैं। वैसे इसके इजाफे के और भी कई कारण हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर नवंबर के महीने में एफपीआई की ओर से कितना निवेश भारत में देखने को मिला है।

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कितना हुआ इजाफा
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने इस महीने में अब तक भारतीय बाजारों में 49,553 करोड़ रुपए डाले हैं। हाई लिक्विडिटी पोजिशन और अमरीकी प्रेसीडेंशियल चुनावों को लेकर असमंजस खत्म होने के बाद वैश्विक संकेतक बेहतर देखने को मिले हैं। जिसकी वजह से भारतीय बाजारों में एफपीआई के निवेश में इजाफा देखने को मिला है। आंकड़ों की बात करें तो एफपीआई ने 3 से 20 नवंबर के दौरान शेयरों में नेट 44,378 करोड़ रुपए का निवेश किया है। जबकि डेट और बांड मार्केट में 5,175 करोड़ रुपए का निवेश देखने को मिला है। इस तरह से विदेशी पोर्टफोलियो की ओर से कुल निवेश 49,553 करोड़ रुपए का देखने को मिला है। जबकि अक्टूबर में एफपीआई ने भारतीय बाजारों में 22,033 करोड़ रुपए का निवेश किया था।

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क्या कहते हैं जानकर
जानकारों की मानें तो नवंबर के महीने में लिक्विडिटी स्टेटस काफी अच्छा देखने को मिला है। दूसरी ओर वैश्विक बाजारों के उठने की वजह से एफपीआई का रुझान भारतीय बाजारों में बढ़ा है। इसके अलावा अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद फैली असमंजस की स्थिति काफी हद तक साफ हो चुकी है। यह भी एक वजह से विदेशी निवेशकों की ओर से भारत में अपने निवेश में इजाफा किया है। वहीं जानकारों की मानें तो भारत में विदेशी निवेश अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद ज्यादा बढ़ा है। आने वाले दिनों में रुपए के मुकाबले डॉलर के और कमजोर होने के आसार दिख रहे हैं।