
काम आई मोदी-आबे की दोस्ती, बुलेट ट्रेन के लिए जापान से 5500 करोड़ मिले
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को लेकर एक बार फिर पीएम मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की दोस्ती काम आई है। जापान की ओर से बुलेट ट्रेन की फंडिंग रोके जाने की खबरों के बीच इसके लिए पहली किस्त जारी हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान ने गुजरात-अहमदाबाद के बीच बनने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन के लिए 5500 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी कर दी है। बुलेट ट्रेन के लिए पहली किस्त जारी करने की जानकारी खुद जापानी दूतावास ने दी है। दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में बुलेट ट्रेन की फंडिंग कर रही जापानी कंपनी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका) ने पश्चिम बंगाल में हावड़ा मैदान से साल्ट लेक सेक्टर 5 तक बनने वाली मेट्रो के लिए भी 1600 करोड़ रुपए की राशि जारी की है। जीका की ओर से बुलेट ट्रेन के लिए पहली किस्त के रूप में 25903 मिलियन जापानी येन की राशि जारी की गई है जो भारतीय रुपयों में करीब 5500 करोड़ रुपए बनती है।
एक सप्ताह पहले आई थी फंडिंग रोकने की खबर
इससे पहले इसी सप्ताह मीडिया में खबरें आई थीं कि जापान ने अहमदाबाद-मुंबई के बीच बनने वाली करीब 508 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन के लिए फंडिंग रोक दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि बुलेट ट्रेन के लिए हो रहे जमीन अधिग्रहण के विरोध के चलते जापानी एजेंसी ने यह फंडिंग रोकी है। रिपोर्ट्स में कहा गया था कि जापानी एजेंसी ने फंडिंग रोकने के साथ कहा था कि पहले भारत सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करे। आपको बता दें कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखी थी। सरकार की योजना 2022 तक देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाने की है।
किसान कर रहे जमीन अधिग्रहण का विरोध
देश में बनने वाली पहली बुलेट ट्रेन के लिए गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में जमीन अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। पहले महाराष्ट्र के किसान इस जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे। अब गुजरात के किसान भी जमीन अधिग्रहण के विरोध में आ गए हैं। यहां तक कि गुजरात के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के विरोध में गुजरात हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। इसके अलावा गुजरात में किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील आनंद वर्द्धन ने भारत में जापानी राजदूत और जीका के इंडिया प्रभारी को भी पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
केंद्र सरकार गठित कर चुकी है स्पेशल कमेटी
गुजरात और महाराष्ट्र के बीच 508 किलोमीटर लंबा बुलेट ट्रेन का ट्रैक बनाया जाना है। इस ट्रैक के निर्माण के लिए जापान की ओर से करीब 1 लाख करोड़ का लोन दिया जाना है। दोनों ही राज्यों में जमीन अधिग्रहण सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस विवाद को निपटाने के लिए केंद्र सरकार एक स्पेशल कमेटी का गठन कर चुकी है। लेकिन दोनों ही राज्यों के किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हो रहे हैं। आपको बता दें कि भारत में बुलेट ट्रेन निर्माण पर नजर रखने के लिए जापान ने सरकारी कंपनी जीका का गठन किया है। वहीं भारत में नंशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआरसीएल) बुलेट ट्रेन निर्माण का कार्य देख रही है।
Published on:
29 Sept 2018 03:59 pm
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