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2019 लोकसभा से पहले मोदी सरकार का बड़ा दांव, कम होंगी GST दरें

2019 लोकसभा चुनाव से पहले केन्द्र सरकार जीएसटी संरचना में कुछ बड़े बदलाव कर सकती है।

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GST Council

2019 लोकसभा से पहले मोदी सरकार का बड़ा दांव, कम होंगी GST दरें

नर्इ दिल्ली। अागामी लोकसभा चुनाव से पहले सरकार कोर्इ भी चुनावी दाव खेलने से नहीं चुक रही है। अब खबर ये है कि वस्तु एंव सेवा कर (जीएसटी) संरचना को लेकर कर्इ बड़े बदलाव करने जा रही है। इसका संकेत देते हुए वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने आज कहा कि जीएसटी परिषद जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए काम कर रही है। एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी दरों के बारे में जल्द ही एक बड़ी घोषणा करेगी।


टैक्स स्लैब में बदलाव की हो रही मांग

शुक्ला आज भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआर्इआर्इ) द्वारा आयोजिज दिल्ली एसएमर्इ फाइनेंस समिट में बोल रहे थे। आपको बात दें कि पिछले कर्इ महीनों से जीएसटी के अंतर्गत टैक्स स्लैब को कम करने की मांग की जा रही है। इसमें सीआर्इआर्इ सहित विभिन्न आैद्योगिक संगठन भी शामिल हैं। इसी साल जनवरी में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जीएसटी बहुत जल्द ही स्थिर हो जाएगा। इसने टैक्स आधार को आैर विस्तार देने का अवसर दिया है।


पिछले साल नवंबर में हुआ था जीएसटी संरचना बदलाव

इसके पहले पिछले साल नवंबर में ही जीएसटी परिषद ने जीएसटी संरचना में बदलाव किया था। इसमें 178 वस्तुआें को 18 फीसदी वाले टैक्स स्लैब में शामिल किया गया था। जीएसटी परिषद ने अपनी बैठक में ये फैसला लिया था कि 28 फीसदी टैक्स स्लैब को केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आैर दूसरे लग्जरी उत्पादाें के लिए ही होगा। मौजदूा समय में जीएटी के केवल चार स्लैब ही है। ये स्लैब 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी आैर 28 फीसदी का है। शुक्ला ने कहा कि, सरकार मध्यम एवं लघु उद्योग (एमएसएमर्इ) को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है आैर उसका अगला कदम इसी को अनुरूप होगा।


पेट्रोल-डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है

बता दें कि केन्द्री पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान भी पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत लाने की बात कह चुके हैं। हालांकि कोर्इ भी राज्य अभी तक पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं दिखार्इ दे रहा है। उद्योग संगठन एसोचैम ने भी आज अपने रिपोर्ट में कहा है कि र्इंधन की कीमतों को कंट्रोल करना है तो इसे जीएसटी के अंतर्गत लाना तर्कसंगत है।