कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें, लगातार दो महीने नहीं भरा GST रिटर्न तो नहीं निकाल पाएंगे E-way Bill

कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें, लगातार दो महीने नहीं भरा GST रिटर्न तो नहीं निकाल पाएंगे E-way Bill

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Apr, 25 2019 07:46:03 AM (IST) | Updated: Apr, 25 2019 07:46:04 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • वित्त मंत्रालय ने ई-वे बिल पर रोक लगने के बारे में दी जानकारी।
  • जीएसटी कम्पोजिशन योजना के तहत कंपनियां यदि लगातार दो बार (छह महीने) रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो वे भी ई वे बिल नहीं निकाल पाएंगे।
  • वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत कंपनियों को अगले महीने की 20 तारीख तक पिछले महीने का रिटर्न दाखिल करना होता है।

नई दिल्ली। लगातार दो माह तक वस्तु एवं सेवा कर रिटर्न ( GST Return ) नहीं भरने वाले कारोबारी 21 जून से वस्तु के परिवहन के लिए ई-वे बिल नहीं निकाल सकेंगे। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। वहीं GST कम्पोजिशन योजना के तहत कंपनियां यदि लगातार दो बार (छह महीने) रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो वे भी ई वे बिल नहीं निकाल पाएंगे।


जीएसटी नियमों के तहत 21 जून तक दाखिल करना होगा रिटर्न

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस बारे में 21 जून, 2019 को अधिसूचित किया है। इसमें कहा गया है कि यदि जीएसटी नियमों के तहत इस अवधि में रिटर्न दाखिल नहीं किया गया तो वस्तु भेजने वाला, पाने वाला, ई-कॉमर्स परिचालक और कूरियर एजेंसी पर इलेक्ट्रॉनिक वे या ई-बिल निकालने पर रोक होगी।

 

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क्या है नियम

नियमों के अनुसार कम्पोजिशन योजना वाले करदाता यदि दो लगातार कर अवधियों के दौरान रिटर्न दाखिल नहीं करेंगे या नियमित करदाता यदि लगातार दो माह तक रिटर्न जमा नहीं कराएंगे तो उनके ई-वे बिल निकालने पर रोक लग जाएगी। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत कंपनियों को अगले महीने की 20 तारीख तक पिछले महीने का रिटर्न दाखिल करना होता है। वहीं कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनने वाले कारोबारियों को तिमाही के अंत के बाद अगले महीने की 18 तारीख तक रिटर्न दाखिल करना होता है।


जीएसटीन की मदद से लग जाएगी रोक

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने ऐसी आईटी प्रणाली स्थापित की है जिसमें निर्धारित अवधि में रिटर्न नहीं दाखिल करने वाली कंपनियों के ई-वे बिल निकालने पर रोक लग जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से जीएसटी चोरी रोकने में मदद मिलेगी। बीते वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर की अवधि में जीएसटी चोरी या उल्लंघन के 15,278 करोड़ रुपये के 3,626 मामले सामने आए हैं।

 

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