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मूडीज ने पेट्रोल पर सरकार को किया सावधान, बढ़ सकता है वित्तीय बोझ

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने नया आंकड़ा जारी किया है, एजेंसी ने सब्सिडी को लेकर सरकार को सावधान किया है।

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Saurabh Sharma

May 25, 2018

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मूडीज ने पेट्रोल पर सरकार को किया सावधान, बढ़ सकता है वित्तीय बोझ

नर्इ दिल्ली। केंद्र सरकार के लिए पेट्रोल आैर डीजल के दाम सिर दर्द बनता जा रहा है। 2014 में जिस तरह से मनमोहन की संप्रग सरकार को पेट्रोलःडीजल की कीमतों में घेरा गया था, उसी कहीं ज्यादा केंद्र की एनडीए सरकार घिरती हुर्इ दिखार्इ दे रही है। वहीं दूसरी आेर एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ने पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर केंद्र को सावधान किया है। एजेंसी का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में क्रूड आॅयल की कीमतों में आैर भी इजाफा हो सकता है। जिसकी वजह से कीमतों में आैर भी ज्यादा वृद्घि हो सकती है! आइए आपको भी बताते हैं कि किस एजेंसी ने केंद्र सरकार को सावधान किया है। साथ ही अपनी रिपोर्ट में आैर क्या कहा है…

मूडीज की रिपोर्ट, केंद्र के लिए नर्इ मुसीबत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार पर कीमतों को नियंत्रित करने का दबाव बढ़ने लगा है। साथ ही सब्सिडी देने का मामला भी जोर पकड़ता जा रहा है। ऐसे में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने नया आंकड़ा जारी किया है। एजेंसी ने सब्सिडी को लेकर सरकार को सावधान किया है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का कहना है कि 2018-19 के वित्त वर्ष में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 60-80 डॉलर प्रति बैरल (4097.70-5463.60 रुपए) होने की स्थिति में सरकार पर 350 अरब से 530 अरब रुपए (35,000-53,000 करोड़ रुपए) का वित्तीय बोझ पड़ेगा।

बढ़ जाएगा वित्तीय बोझ
पिछले तीन वर्षों में यह सबसे ज्यादा होगा। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने मौजूद वित्तीय वर्ष के लिए महज 250 अरब रुपए का प्रावधान किया है। मूडीज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा होने पर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाने को कहा जा सकता है।

नहीं कम होंगे दाम
केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों को वैश्विक स्तर के अनुकूल बनाने के लिए इसे नियंत्रण से मुक्त कर दिया था। बढ़ती कीमतों से पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की चर्चा जोरों पर है। हालांकि, मूडीज का मानना है कि सरकार द्वारा मौजूदा व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव करने की संभावना बेहद कम है। गौरतलब बात ये है कि अमरीका के ईरान करार से बाहर होने और तेल उत्पादक देशों द्वारा तेल उत्पादन को नियंत्रित करने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

12वें दिन लगातार बढ़े दाम
भारत में तेल की कीमत पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा हो गया है। कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बाद तेल की कीमतों में वृद्धि शुरू हो गई थी। जिसके बाद से लगातार 12वें दिन लगातार तेल के दाम बढ़े हैं। शुक्रवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 36 पैसे का इजाफा हुआ। जिससे पेट्रोल की कीमत बढ़कर 77.83 रुपए प्रति लीटर हो गर्इ है। वहीं बात डीजल की करें तो गुरुवार के मुकाबले 22 पैसे का इजाफा हुआ है। अब दिल्ली में डीजल की कीमत 68.75 रुपए प्रति लीटर हो गर्इ है। मुंबर्इ में भी पेट्रोल की कीमतों में 36 पैसे की बढ़ोत्तरी हुर्इ है। जिससे पेट्रोल की कीमत बढ़कर 85.65 रुपए प्रति लीटर हो गर्इ है। वहीं डीजल की बात करें तो उसमें भी 24 पैसे का इजाफा होकर 73.20 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

आज देश के प्रमुख शहरों में बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम








































शहरपेट्रोल के दामआज इतने बढ़ेडीजल के दामआज इतने बढ़े
दिल्ली77.83 रुपए36 पैसे68.75 रुपए22 पैसे
मुंबर्इ85.65 रुपए36 पैसे73.20 रुपए24 पैसे
चेन्नर्इ80.80 रुपए38 पैसे72.58 रुपए23 पैसे
कोलकाता80.47 रुपए35 पैसे71.30 रुपए22 पैसे


अभी चैलेंज आैर भी हैं
पेट्रोल डीजल की कीमतों का असर आने वाले कुछ विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है! ताज्जुब की बात तो ये है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान आैर छत्तीसगढ़ राज्यों में बीजेपी की सरकार है। एेसे में इन राज्यों के चुनावों में बीजेपी को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एमपी आैर छत्तीसगढ़ को वैसे भी बीजेपी का दुर्ग कहा जाता है। एेसे में इन दोनों राज्यों के हाथ जाने से आने वाले लोकसभा चुनावों में भी काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। एेसे में बीजेपी आलाकमान में लगातार चिंता की रेखाएं बढ़ रही हैं।