3 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उज्ज्वला योजना: घर की शोभा बढ़ा रहे चूल्हे आैर सिलेंडर, गैस भरवाने के नहीं है पैसे

उज्ज्वला योजना के तहत कर्इ गरीब परिवारों को गैस सिलेंड अौर चूल्हा तो मिल गया है लेकिन सिलेंडर को दोबारा भरवाने के लिए उनके पासा पैसे नहीं है।

2 min read
Google source verification
Ujjawala YOjna

नर्इ दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वकांक्षी परियोजनआें में से एक "उज्ज्वला योजना" भी बाकी योजनाअों की अब फेल होता हुआ दिखार्इ दे रहा है। अब गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम आैर उन्हें दोबारार न भरवा पाने की परेशानी से गरीबों को दो-चार होना पड़ रहा है। उज्ज्वला योजना के तहत कर्इ गरीब परिवारों को गैस सिलेंड अौर चूल्हा तो मिल गया है लेकिन सिलेंडर को दोबारा भरवाने के लिए उनके पासा पैसे नहीं है। लिहाजा उन्हें एक बार फिर से लकड़ी पर ही खाना बनाना पड़ रहा है। अाइए जानते हैं कितना कारगर है उज्ज्वला योजना..


दोबारा सिलेंडर भरवाने के नहीं हैं पैसे

मध्य प्रदेश के जबलपुर से मंडला की आेर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक आदिवसी बहुल गांव है सिंघपुर। सड़क किनारे एक छोटी सी परचून की दुकान चलाने के साथ सिलाई का काम करने वाली गोमती को उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर और चूल्हा तो मिल गया है, मगर सिलेंडर दोबारा भरवाने के लिए पैसे उसके पास नहीं हैं। गोमती (30) महज एक ऐसी महिला है, जिसने खुलकर अपनी व्यथा बताई। वह कहती है कि सरकार की योजना अच्छी है, गैस सिलेंडर और चूल्हा सौ रुपये देने पर मिल गया, मगर सिलेंडर खाली होने पर उसे दोबारा भरवाने के लिए आठ सौ रुपये कहां से लाएं? सब्सिडी का पैसा तो बाद में आएगा।


घर की सिर्फ शोभा बढ़ा रहे हैं गैस चूल्हा आैर सिलेंडर

गोमती जैसे देश के कर्इ गरीब परिवारों के लिए हर महीने आठ सौ रुपये ईंधन पर खर्च करना आसान नहीं है।गोमती का कहना है कि अगर वास्तव में सरकार चाहती है कि आदिवासी और गरीब महिलाओं की आंखें सुरक्षित रहें, वे स्वस्थ्य रहें तो उसे मुफ्त में गैस सिलेंडर देना होगा, तभी गरीब लोग उसका उपयोग कर पाएंगे, नहीं तो चूल्हा और सिलेंडर सिर्फ घर की शोभा बढ़ाएंगे। सरकारी अमले के इस रवैये से गरीब तबका बेहद खफा है।

आवेदन के बाद भी नहीं मिल रहे गैस सिलेंडर

उनका है कि गैस सिलेंडर के लिए उनसे कई बार आवेदन लिए जा चुके हैं, कभी कहते हैं कि आधार कार्ड की कॉपी दो, तो कभी राशनकार्ड की कॉपी मांगते हैं। कई बार दे चुके हैं, मगर सिलेंडर अब तक नहीं मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो बड़े और गरीबों के हितकारी डीम प्रोजेक्ट हैं, जिनमें एक हर घर में शौचालय और गरीबों को सस्ती दर पर गैस सिलेंडर मुहैया कराना। आदिवासी स्थानों में जाकर यही लगता है कि ये दोनों योजनाएं सिर्फ कुछ इलाकों तक ही कारगर होकर रह गई होंगी।


हकीकत आैर मोदी के सपने में जमीन-आसमान की अंतर

प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस बात का हवाला देते हुए नहीं थकते हैं कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिला के शरीर में हर रोज कई सौ सिगरेट के धुएं के बराबर धुआं जाता है। इससे उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। महिला स्वस्थ्य रहे, इसलिए उसे चूल्हे के धुएं से दूर रखना होगा, लिहाजा उसे सस्ती दर पर गैस सिलेंडर दिया जा रहा है। इसके बावजूद जो हकीकत है, वह गांव और जमीन पर पहुंचकर सामने आती है, आंकड़े भले ही चाहे जो गवाही दें।