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डाॅलर के मुकाबले रुपए के डूबने के बीच विदेशी कर्ज में आर्इ बड़ी कमी, आरबीआर्इ ने दी जानकारी

आरबीआर्इ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि विदेशी कर्ज में बड़ी कमी आर्इ है।
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Saurabh Sharma

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Updated: 29 Sep 2018, 12:18 PM IST

RBI

डाॅलर के मुकाबले रुपए के डूबने के बीच विदेशी कर्ज में आर्इ बड़ी कमी, आरबीआर्इ ने दी जानकारी

नर्इ दिल्ली। पिछले कुछ समय से डाॅलर के मुकाबले रुपए के डूबने के बीच एक बड़ी राहत की कमी आर्इ है। आरबीआर्इ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि विदेशी कर्ज में बड़ी कमी आर्इ है। जानकारी के अनुसार वाणिज्यिक कर्ज , अल्पावधि कर्ज और अनिवासी भारतीय (एनआरआई) की जमा राशि में कमी आने से जून तिमाही में देश का कुल बाहरी कर्ज पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही की तुलना में 2.8 फीसदी कम होकर 514.40 अरब डॉलर रह गया। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।

कम हुआ बाहरी कर्ज
आंकड़ों की मानें तो देश का कुल बाहरी कर्ज मार्च तिमाही के स्तर से 14.9 अरब डॉलर कम होकर जून तिमाही में 514.4 अरब डॉलर रह गया। जून तिमाही अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले बाहरी कर्ज अनुपात 20.4 फीसदी पर आ गया। मार्च तिमाही अंत तक यह अनुपात 20.5 फीसदी था। कुल बाहरी कर्ज में वाणिज्यिक कर्ज की सर्वाधिक 37.8 फीसदी हिस्सेदारी रही है। इसके बाद एनआरआई जमा 24.2 फीसदी और अल्पावधि व्यापार ऋण 18.8 फीसदी रहा है।

इतनी आर्इ कमी
जून 2018 के अंत तक लंबे समय वाले ऋण मार्च तिमाही की तुलना में 11.4 अरब डॉलर कम होकर 415.70 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा के संदर्भ में अमरीकी डॉलर से प्रभावी ऋण जून 2018 के अंत तक देश के कुल बाहरी कर्ज में सर्वाधिक 50.1 फीसदी का हिस्सेदार रहा है। इसके बाद भारतीय रुपया 35.4 फीसदी, एसडीआर 5.4 फीसदी, जापानी येन 4.7 फीसदी और यूरो 3.3 फीसदी का स्थान रहा है।

देश में बढ़ा है विदेश पूंजी भंडार
देश का विदेशी पूंजी भंडार 28 सितम्बर को समाप्त सप्ताह में 1.30 अरब डॉलर बढ़कर 401.79 अरब डॉलर हो गया, जो 28,831.1 अरब रुपये के बराबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी साप्ताहिक आंकड़े के अनुसार, विदेशी पूंजी भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा भंडार आलोच्य सप्ताह में 1.25 अरब डॉलर बढ़कर 377.41 अरब डॉलर हो गया, जो 27,098.2 अरब रुपये के बराबर है। बैंक के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर में व्यक्त किया जाता है और इस पर भंडार में मौजूद पाउंड, स्टर्लिग, येन जैसी अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। आलोच्य अवधि में देश का स्वर्ण भंडार 20.41 अरब डॉलर रहा, जो 1,448.1 अरब रुपये के बराबर है।