Supreme Court का बड़ा फैसला, किसी भी सूरत में बेटी को मिलेगा Paternal Property पर आधा हक

  • Hindu Succession Act, 2005 से पहले पिता की मृत्यु होने के बाद भी बेटी को मिलेगा पैतृक संपत्ति आधा हक
  • साल 2005 में बना था कानून, बेटा और बेटी दोनों को अपने पिता की Paternal Property में समान अधिकार होगा

By: Saurabh Sharma

Updated: 11 Aug 2020, 06:31 PM IST

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में परिवार की पैतृक संपत्ति ( Paternal Property ) पर बेटी का आधा होगा ही। सुप्रीम कोर्ट को यह फैसला इसलिए भी सुनाना पड़ा क्योंकि यह कंफ्यूजन भी था कि पिता कि मौत अगर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 2005 ( Hindu Succession Act, 2005 ) से पहले हो गई हो तो भी बेटी इसका अधिकार ले सकेगी या नहीं। इस सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है। हिंदू महिलाओं को अपने पिता की प्रॉपर्टी में भाई के बराबर हिस्सा मिलेगा।

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कानून बनने के बाद भी था कंफ्यूजन
वास्तव में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में 2005 को यह बदलाव हुआ था कि देश में पिता की पैतृक संपत्ति पर पुत्र और पुत्री को बराबर हिस्सा मिलेगा। वहीं इस बात को लेकर संशय भी था कि अगर पिता की मौत 2005 से पहले हो जाती है तो क्या यह नियम लागू होगा या नहीं। इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने फैसला दिया कि ये कानून हर परस्थिति में लागू होगा। पिता की मौत होने पर भी यह अधिकार बेटियों को बेटों के बराबर दिया जाएगा।

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2005 में बना था कानून
2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून में 50 साल के बाद संशोधन किया गया था। जिसके पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबर की हिस्सेदारी देने की बात कही गई है। कानून के तहत बेटी भी बेटों तरह क्लास 1 कानूनी वारिस है। बेटी की शादी से उसका कोई लेना देना नहीं है। बेटी अपने हिस्से की प्रॉपर्टी पर दावा किया जा सकता है।

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फैसले सब हो गया है साफ
पैतृक संपत्ति:- पैतृक संपत्ति वो होती है जो पिछली चार पीढिय़ों से पुरुषों को मिलती आई है। नए कानून के अनुसार जन्म से बेटी और बेटे दोनों का बराबर हक होता है। कानून के अनुसार पिता ऐसी संपत्ति को अपने तरफ से किसी को नहीं दे सकता। इसका मतलब ये हुआ कि वो किसी एक के नाम नहीं दे सकता है।

पिता की खुद की प्रॉपर्टी: पिता की खुद की प्रॉपर्टी पर बेटी का हक नहीं होता है। पिता द्वारा खरीदा गया घर या फिर जमीन को अपने इच्छा से किसी के भी नाम कर सकता हैै। ऐसी स्थिति में बेटी अपने हक की आवाज को नहीं उठा सकती है।

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