पीएम मोदी के खास मंत्री ने किया यूपीए सरकार की इस योजना गुणगान, बताया लॉकडाउन में कैसे मिली मदद

  • नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ग्रामीण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी रोजगार योजना
  • कोरोना में वापस लौटे ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रिकॉर्ड 344 करोड़ मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ

By: Saurabh Sharma

Updated: 24 Feb 2021, 10:25 AM IST

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी रोजगार योजना है जो कोरोना काल में लौटे प्रवासी श्रमिकों के लिए बड़ा संबल साबित हुई। उन्होंने बताया कि इस साल मनरेगा के तहत रिकॉर्ड 344 करोड़ मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ है।

मनरेगा सबसे बड़ी रोजगार योजना
केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि एवं किसान कल्याण और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में मंगलवार को द्रीय रोजगार गारंटी परिषद की 22वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी रोजगार योजना है। इस वर्ष कोविड-19 के संकटकाल में मनरेगा लॉकडाउन के कारण बेरोजगार होकर अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों के लिए एक बड़ा संबल साबित हुई है। इस वर्ष अबतक कुल 344 करोड़ मानव दिवस रोजगार का सृजन मनरेगा के माध्यम से किया जा चुका है, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

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1.61 करोड़ नए जॉब कार्ड जारी
तोमर ने बताया कि यह विगत वर्ष की तुलना में 44 फीसदी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों से अब तक लगभग 72 लाख टिकाऊ और उपयोग संरचनाओं का भी निर्माण हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस वर्ष 1.61 करोड़ नए जॉब कार्ड जारी किए गए, जबकि पिछले वर्षों में इनकी संख्या लगभग 80 लाख थी। इससे जाहिर है कि बेरोजगार होकर अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने में मनरेगा योजना प्रभावी और कारगर माध्यम रही है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत निर्मित कुल 4.29 करोड़ संपत्ति अब तक राज्य और केंद्र सरकार के समन्वित प्रयास से जियो टैग की जा चुकी है।

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मनरेगा के लिए 1,11,500 करोड़ रुपए आवंटित
तोमर ने बताया कि वर्ष 2020-21 में मनरेगा के लिए 1,11,500 करोड़ रुपए राज्यों को आवंटित किए गए हैं जो कि अब तक की सर्वाधिक धनराशि है। इसमें से 93 हजार करोड़ रुपये राज्यों को जारी भी कर दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोरोना संकट काल में प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 12 मंत्रालयों के समन्वय से 6 राज्यों के 116 जिलों में चलाए गए गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 125 दिनों में 50.78 करोड़ मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया। इस योजना के लिए भी 50 हजार करोड़ रुपये का व्यय का प्रावधान किया गया था।

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