
Wholesale inflation rate reaches 7-month high before festive season
नई दिल्ली। खाद्य पदार्थ की ऊंची कीमतों, प्राइमरी आर्टिकल्स और निर्मित वस्तुओं की ज्यादा कीमतों ने भारत की थोक महंगाई को तेज कर दिया है। ताज्जुब की बात तो ये है कि आने वाले दिनों में फेस्टिव सीजन शुरू होने जा रहा है। नतीजतन, थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर सितंबर में बढ़कर 1.32 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 0.16 प्रतिशत थी। इन आंकड़ों के अनुसार देश में थोक महंगाई दर 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। साल-दर-साल के आधार पर, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी थोक मूल्य सूचकांक डेटा पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान के मुकाबले केवल 0.33 फीसदी बढ़ा है।
यह आंकड़े भी हुए जारी
- प्राइमरी आर्टिकल्स डब्ल्यूपीआई आधारित सूचकांक पर सितंबर में 150.3 पर रहे और सालाना महंगाई दर 5.10 फीसदी रही।
- अगस्त में सूचकांक 146.3 पर और महंगाई दर 1.60 फीसदी रही थी।
- फ्यूल और पॉवर सितंबर महीने में डब्ल्यूपीआई आधारित सूचकांक में 91 फीसदी पर और सालाना महंगाई दर -9.54 फीसदी पर रही है।
- अगस्त महीने में सूचकांक में 91.4 फीसदी पर व महंगाई दर -9.68 फीसद रही थी।
- विनिर्मित उत्पाद दर सितंबर महीने 119.8 फीसदी पर रहे और सालाना महंगाई दर 1.61 फीसदी रही।
- अगस्त में ये सूचकांक में 119.3 पर और महंगाई दर 1.27 रही थी।
- सितंबर महीने में फूड इंडेक्स डब्ल्यूपीआई आधारित सूचकांक में 157.6 फीसदी पर और सालाना महंगाई दर 6.92 फीसदी रही।
- अगस्त महीने में फूड इंडेक्स डब्ल्यूपीआई सूचकांक में 153.3 पर और महंगाई दर 4.07 फीसदी रही थी।
खुदरा महंगाई दर में इजाफा
भारत की अनुक्रमिक खुदरा मूल्य मुद्रास्फीति में अगस्त की तुलना में सितंबर में बढ़ोतरी हुई है। यह अगस्त में 6.69 फीसदी थी, जो कि सितंबर में बढ़कर 7.34 फीसदी हो गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक अगस्त 2020 के 9.05 फीसदी के मुकाबले सितंबर में 10.68 फीसदी हो गया है।
Published on:
14 Oct 2020, 4:53 PM IST
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