
देशभर में कई निजी व सरकारी ऐसे संस्थान हैं जो अपने फाइनेंशियल वर्क को मैनेज व ऑर्गेनाइज करने के लिए एक अकाउंटेंट या सीए यानी चार्टर्ड अकाउंटेंट को अपॉइंट करते हैं। इन दिनों युवाओं की दिलचस्पी भी काफी ज्यादा है। दी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) एक सरकारी संस्थान है जो सीए के लिए परीक्षा का आयोजन करती है। यह परीक्षा मुख्य रूप से तीन स्तर पर होती है जिन्हें क्लीयर करने के बाद कई बड़ी कंपनियों में बतौर सीए पहचान बना सकते हैं। इस परीक्षा की तैयारी के दौरान स्टूडेंट्स को प्रेक्टिकल और थ्योरिटिकल दोनों स्तर पर अध्ययन करवाया जाता है।
जरूरी योग्यता
12वीं कक्षा में अध्ययनरत स्टूडेंट्स फाउंडेशन कोर्स के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। फाउंडेशन क्लीयर करने के अलावा डायरेक्ट एंट्री रूट से भी आइपीसीसी का हिस्सा बना जा सकता है। इसके लिए स्टूडेंट का न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों से किसी भी संकाय से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है।
तीन स्तरीय परीक्षा
फाउंडेशन कोर्स: सीए में कॅरियर बनाने के लिए यह पहला पड़ाव है। इसमें मुख्य रूप से अकाउंटिंग, बिजनेस लॉ एंड बिजनेस रिपोर्टिंग, बिजनेस मैथेमेटिक्स एंड लॉजिकल रीजनिंग, बिजनेस इकोनॉमिक्स एंड कमर्शियल नॉलेज आदि शामिल हैं। स्टूडेंट्स को यह स्तर पास करने के लिए परीक्षा के तहत प्रत्येक विषय में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक और कुल मिलाकर 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होते हैं।
इंटरमीडिएट कोर्स : यह सीए बनने का दूसरा पड़ाव है। इसमें अकाउंटिंग और कॉर्पोरेट लॉ के अलावा कॉस्ट अकाउंटिंग, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, टैक्सेशन, एडवांस्ड अकाउंटिंग, एंटरप्राइजेज इंफॉर्मेशन सिस्टम एंड स्ट्रेटिजिक मैनेजमेंट आदि विषय होते हैं। दो ग्रुप में परीक्षा होती है। प्रत्येकमें चार विषय होते हैं। आर्टिकलशिप के लिए एक ग्रुप पास करना होता है। सीए इंस्टीट्यूट में ओरिएंटेशन ट्रेनिंग, आइटी ट्रेनिंग लेनी होती है।
सीए फाइनल एग्जाम : इंटरमीडिएट एग्जाम पास करने के बाद स्टूडेंट को फाइनल कोर्स के लिए योग्य माना जाता है। इस कोर्स में दो ग्रुप होते हैं। ग्रुप-। में चार कोर पेपर और ग्रुप-।। में भी चार ही होते हैं लेकिन इसमें तीन कोर और एक इलेक्टिव पेपर होता है। इस स्तर को पास करने के लिए स्टूडेंट को न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्रत्येक विषय में लाने होते हैं और कुल मिलाकर 50 प्रतिशत अंक प्रत्येक ग्रुप में लाने अनिवार्य हैं। खास बात है कि आर्टिकलशिप की तीन वर्षीय ट्रेनिंग के दौरान स्टूडेंट्स पहले एक साल के बाद ही कभी भी आर्टिकलशिप संबंधित एग्जाम दे सकता है। इसमें प्राप्त ग्रेड को सीए फाइनल की मार्कशीट पर अंकित किया जाता है।
आर्टिकलशिप ट्रेनिंग
आइपीसीसी क्लीयर करने के बाद स्टूडेंट को तीन साल की आर्टिकलशिप करनी होती है जिसके तहत उसे किसी सीए के अंडर काम करना होता है। आजकल आर्टिकलशिप के दौरान स्टूडेंट के लिए कम्प्यूटर एप्लीकेशन की 15-15 दिन की दो क्लासेज और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की 15-15 दिन की दो क्लासेज संचालित की जाती हैं।
नौकरी के हैं
कई मौके
स्टूडेंट्स मानते हैं कि सीए क्लीयर करने के बाद केवल सीए संबंधित ही काम किया जा सकता है। इसके अलावा कई काम ऐसे भी हैं जो सीए बनकर किए जा सकते हैं। सीए प्रोफेशनल बतौर टैक्स व ऑडिट ऑफिसर के अलावा ट्रेवल इंवेस्टिगेटर, सिस्टम ऑडिटर, सॉफ्टवेयर ऑपरेटर, बिजनेस कंसल्टेंट के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप स्ट्रैटेजी मेकर आदि के लिए काम कर सकता है। सीए बनने के बाद अभ्यर्थी सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर में नौकरी पा सकते हैं। उसे ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने के लिए भी कहा जा सकता है।
लोकेश कासट , चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं अध्यक्ष, सीए इंस्टीट्यूट (जयपुर शाखा)
Published on:
17 Jul 2019 07:59 pm
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