
Students studying Sanskrit can also become doctors(Image-Freepik)
संस्कृत के माध्यम से आयुर्वेद में रुचि रखने वाले विद्यार्थी कक्षा 11 से ही आयुर्वेद की पढ़ाई कर आयुर्वेद चिकित्सक बन सकेंगे। इसके लिए नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) विशेष कोर्स शुरू करने जा रहा है। इसे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू) की ओर से संचालित किया जाएगा। इसके लिए अलग से प्रवेश परीक्षा होगी और छात्र दसवीं कक्षा के बाद इसमें एडमिशन ले सकेंगे। इसके तहत दो वर्ष का प्री-आयुर्वेद कोर्स, साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस व एक साल की इंटर्नशिप होगी। वहीं, सीएसयू के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी एवं एनसीआइएसएम की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर ने मंगलवार को आयुर्वेद गुरुकुलम् एफिलिएशन पोर्टल की शुरुआत की और आयुर्वेद गुरुकुलों की मान्यता के लिए दिशा-निर्देशों भी जारी किए।
केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय नीट की तर्ज पर प्री-बीएएमएस आयुर्वेद प्रोग्राम एंट्रेंस टेस्ट (पीएपी नीट) की प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। आयुर्वेद गुरुकुलों को मान्यता देने का कार्य भी नोडल एजेंसी के रूप में केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय करेगा। विश्वविद्यालय के परिसरों में आयुर्वेद गुरुकुलम् कार्यक्रम प्रारम्भ होगा। इसकी शुरुआत नासिक व दिल्ली कैंपस से होगी।
डॉ. कोठेकर ने कहा कि नई पहल आयुर्वेद में शास्त्रीय प्रामाणिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं पारदर्शिता को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि यह कोर्स भारतीयता, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और तत्त्वज्ञान के समन्वय से विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्रदान करेगा। गुरुकुल आधारित मॉडल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा।
Published on:
15 Jan 2026 10:12 am
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