
right to education
नौ साल की जाह्नवी वाजा को भावनगर के एक प्राइवेट स्कूल में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत चौथी क्लास में मुफ्त में डायरेक्ट एडमिशन मिला है। यह अहमदाबाद का पहला मामला है। एजुकेशन अथॉरिटीज ने जाह्नवी की मां सोनलबेन वाजा को 25900 रुपए भी वापस किए है। यह पैसे सोनलबेन ने जाह्नवी की फीस के तौर पर पिछले तीन सालों में भरे थे। इसके अलावा सरकार ने बच्ची की स्कॉलरशिप के तौर पर बच्ची की मां को 9000 रुपए भी दिए हैं। बच्ची को हर साल 3000 रुपए बतौर स्कॉलरशिप दिए जाएंगे।
यह सब इसलिए हुआ है क्योंकि जाह्वी को वर्ष 2015 में सरदार पटेल ग्रुप के गजजीभाई सुतारिया प्राइमरी स्कूल में आरटीई नॉर्म्स के तहत फ्री एडमिशन देने के लिए इंकार कर दिया गया था। यह स्कूल जाह्नवी को प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर ने अलॉट किया था। जबकि स्कूल ने आरटीई के तहत जाह्नवी को एडमिशन देने से मना कर दिया था।
जाह्नवी की मां ने उसका एडमिशन करवा कर फीस भरते हुए उसकी पढ़ाई जारी रखी। हालांकि सोनलबेन ने यह मामला गुजरात स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स सहित अन्य हायर अथॉरिटीज तक उठाया, लेकिन बात नहीं बनी। सोनलबेन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जब मैंने स्कूल के एडमिशन न देने की बात अधिकारियों को बताई तो उन्होंने मुझसे ओरिजनल कॉल लैटर ले लिया और इसे वापस नहीं लौटाया। शुक्र है मेरे पास उस लेटर की फोटोकॉपी मौजूद थी, यही मेरे पास एकमात्र सबूत था।
वाजा एक प्राइवेट नर्सिंग होम में काम करती है और अपने दो बच्चों का पालन पोषण अकेले ही कर रही है। वाजा ने एक्टिविस्ट की मदद से गुजरात हाई कोर्ट में गुहार लगाई, जिसके बाद पिछले साल जुलाई में गुजरात हाई कार्ट ने सरकारी अथॉरिटीज से इस बारे में जवाब मांगा। हाईकोर्ट से नोटिस मिलने के बाद अथॉरिटीज का जवाब बदल गया। जिला कलेक्टर ने जिला प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर को मामला सुलझाने के आदेश दिए।
वाजा के पास अथॉरिटीज से कॉल आया, जिसके बाद जाह्नवी को फ्री एडमिशन दिया गया। जाह्नवी को अब उसी ग्रुप के दूसरे स्कूल में एडमिशन मिला है। यह स्कूल उसके घर से ६ किलोमीटर दूर है, लेकिन वाजा खुश है कि आखिर उसकी बच्ची को आरटीई के तहत फ्री एडमिशन मिल गया। उसने सोशल मीडिया पर एजुकेशन डिपार्टमेंट से मिले चैक की भी तस्वीरें पोस्ट की हैं।
Published on:
02 Jun 2018 12:16 pm
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