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भारत में शिक्षा व सीखने के प्रयासों को आने बढ़ाने में सहयोग के तहत गूगल की परोपकारी शाखा गूगल डॉट ओआरजी ने गुरुवार को दो गैर लाभकारी संगठनों-सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन व द टीचर एप को 30 लाख डॉलर का अतिरिक्त अनुदान देने की घोषणा की। ऑनलाइन वीडियो सीखने के लोकप्रिय माध्यम के तौर पर उभरने के साथ गूगल डॉट ओआरजी यूट्यूब लर्निग टीम की मदद से सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन को 20 लाख डॉलर का अनुदान व तकनीकी सहायता सहायता प्रदान करेगी। सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन एक पॉलिसी थिंक टैंक है, जो स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम करता है। इसमें कोई दोराय नहीं कि जब तक भारत सीखने-सिखाने में माहिर नहीं होगा, तब तक आगे बढऩे में मुश्किलें आती रहेंगी, लेकिन गूगल के प्रयासों से इसमें गति मिल सकती है।
कैसे सुधरेगी स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता...
यह अनुदान 20 सामग्री निर्माताओं को उनके 200 घंटे की गुणवत्तायुक्त विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित की सामग्री हिंदी में और स्थानीय भाषा में बनाने के लिए मिलेगा।
गूगल डॉट ओआरजी इसके साथ ही द टीचर एप को 10 लाख डॉलर का अनुदेना देगी, जिसका मकसद शिक्षकों को सही प्रशिक्षण व गणित, विज्ञान, भाषा व शिक्षा विज्ञान के संसाधनों से सशक्त करना है। इस निधि का इस्तेमाल दो सालों में 500,000 शिक्षकों तक मंच की पहुंच बनाने के लिए किया जाएगा।
इसके पीछे क्या है गूगल की मंशा...
गूगल डॉट ओआरजी के शिक्षा प्रमुख निक केन ने कहा, "हम मानते हैं कि प्रौद्योगिकी भारत में सीखने के अंतर को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और भारत में सभी शिक्षकों व छात्रों को इसका लाभ सुनिश्चित करने के लिए हम अपने निवेश को विस्तार दे रहे हैं।" इसका मतलब साफ है कि शिक्षा का स्तर जितना सुधरेगा, उतना ही गूगल का भी विस्तार होगा। वैसे भी इस दिशा में दूसरे देशों के मुकाबले काफी पीछे है। खैर बात चाहे जो हो, सच तो यह है कि यदि गूगल की योजना कारगर साबित हुई, तो यकीनन भारतीय शिक्षा का स्तर ऊंचाइयां छुएगा।
Published on:
04 May 2018 07:57 pm
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