
IIT Kharagpur
आईआईटी खडग़पुर में री-वॉटर रिसर्च सेंटर की शुरुआत होने जा रही है। यह सेंटर दो एल्युमिनाय मेंबर्स की ओर से दिए गए फंड से स्थापित किया जा रहा है। यहां देश की दो बड़ी समस्याएं सीवेज डिस्पोजल और पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध करवाने के लिए रिसर्च किया जा सकेगा। आईआईटी खडग़पुर के ६८वें स्थापना दिवस के अवसर पर इंस्टीट्यूशन ने यह घोषणा की।
एल्युमिनाय मेंबर अनीश रेड्डी ने बताया कि जिस तरह पीने के पाने और अन्य कामों के लिए पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है, अगर इस दिशा में काम न किए गए तो आने वाले सालों में यह समस्या बहुत बड़ी बन जाएगी। इसके अलावा शहरों में सीवेज डिस्पोजल की समस्या भी बढ़ती जा रही है। इन दनों समस्याओं को जोड़ कर एक समाधान निकालना चुनौतीपूर्ण है। रेड्डी ने बताया कि आदित्य चौबे सेंटर फॉर री-वॉटर रिसर्च सरकार से नेटवर्किंग करेगा और तकनीक व प्रोसेस की मदद से इस समस्या का समाधान लाने पर काम करेगा।
इंस्टीट्यूट कैम्पस के अंदर ही प्लांट लगाएगा, जिससे रोजाना होस्टल्स से १.३५ मिलियन लीटर सीवेज पानी को १.२ मिलियन लीटर पोर्टेबल वॉटर में कनवर्ट करने का काम करेगा। यह पायलट प्लांट मार्च २०१९ तक तैयार होने की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा रिसचर्स ऐसी तकनीक भी डेवलप करेंगे, जिसे इस प्लांट को बाजार में भी उपलब्ध करवाया जा सके। एल्युमिनाय अनंत चौबे ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को आंत्रप्रॉन्योर्स और सरकारी एजेंसियों को आकर्षित करने के लिए बनाया जा रहा है, ताकि इस प्रोजेक्ट को और फंड्स मिल सकें।
आईआईटी खडग़पुर के डायरेक्टर प्रोफेसर पीपी चक्रबर्ती ने बताया कि इस तरह वॉटर सस्टेनेबिलिटी मॉडल्स विदेशों में भी अपनाए गए हैं। प्रोफेसर चक्रब्रर्ती ने बताया कि हमें उम्मीद है कि यह मॉडल्स जल्द ही गांवों में भी लगाए जा सकेंगे। इस रिसर्च के लिए हम विदेशी वॉटर एक्सपर्ट्स और प्रोफेशनल्स को भी बतौर रिसचर्स और एडवाइजर इस प्रोजेक्ट में शामिल करेंगे। इसके अलावा अनीश और अनंत भी इस प्रोजेक्ट में एडवाइजर्स रहेंगे।
Published on:
19 Aug 2018 12:23 pm
बड़ी खबरें
View Allशिक्षा
ट्रेंडिंग
