
study abroad
वदेश जाकर पढ़ाई करने का विचार तो करीब करीब हर स्टूडेंट के मन में आता है, लेकिन ऐसे बहुत से भ्रम हैं, जिनके चलते जितनी जल्दी यह विचार मन में आता है उससे कहीं जल्दी यह काफूर भी हो जाता है। हालांकि अब वक्त है इन सब मिथ्यों को पीछे छोड़ सच से मुलाकात करने का। यहां पढ़ें विदेश में पढ़ाई से जुड़े कुछ मिथ्य और उनका सत्य -
मिथ्य : विदेश में पढऩा बहुत महंगा है
सच : कुछ डिग्रीज के लिए कहीं भी पढ़ाई की जाए वह महंगी ही होती है। हालांकि विदेश से की गई डिग्री की वैल्यू अपने आप ही बढ़ जाती है। हालांकि जिस तरह विदेश से डिग्री या पढ़ाई करने का चलन बढ़ रहा है, उसे देखते हुए अब कई तरह के फाइनेंशियल सपोर्ट उपलब्ध हैं। इसमें एजुकेशन लोन से लेकर स्कॉलरशिप्स तक मौजूद हैं। कई यूनिवर्सिटीज विदेशी स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप प्रोग्राम्स चलाती है। आवेदन करते समय इस बारे में पूरी जानकारी ले लेने से आपकी यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
मिथ्य : एम्पलॉयर्स को कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने विदेश से पढ़ाई की है
सच : बदलते दौर में विदेश से लिया गया कोई भी एम्सपीरिएंस आपको करियर में बड़े मुकाम हासिल करने में मदद कर सकता है। सबसे अहम बाद आपकी विदेशी पढ़ाई का आपके एम्पलॉयर पर कभी भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मिथ्य : विदेश में जाकर दोस्त बनाना बहुत मुश्किल होता है
सच : बेशक जीवन में परिवार के बाद अगर कोई दिल के सबसे ज्यादा करीब होता है तो वो होते हैं दोस्त। इंसान जहां भी जाता है वहीं दोस्त बनाने की काबलियत रखता है। विदेशों में भी जाकर दोस्त बनाए जा सकते हें। इसके लिए ज्यादातर यूनिवर्सिटीज में कई तरह के इवेंट्स और कल्चरल प्रोग्राम्स होते हैं, जहां आपको कई लोगों से मिलने का अवसर मिलता है। सबसे बड़ी बात विदेशी यूनिवर्सिटीज में कई देशों से स्टूडेंट्स पढऩे आते हैं। इसके चांसेस बहुत ज्यादा हैं कि आपको आपके ही देश के लोग वहां भी मिल जाएं।
मिथ्य : सीखनी पड़ेगी लोकल भाषा
सच : जब तक आपको इंग्लिश आती है, तब तक ज्यादातर देशों में वहां की भाषा सीखने की जरूरत नहीं पड़ती। इंग्लिश से ही आपका काम चल जाता है। ज्यादातर विदेशी यूनिवर्सिटीज में इंग्लिश भाषा का इस्तेमाल होता है। हालांकि कुछ देशों में अंग्रेजी भाषा को ज्यादा तरजीह नहीं दी जाती, ऐसे में हो सकता है कि आपको वहां की भाषा सीखनी भी पड़े।
मिथ्य : विदेश में पढ़ाई करने से ग्रेजुएशन में देरी हो सकती है
सच : बेशक विदेशों में एडमिशन प्रक्रिया के लिए आपको एक साल एडवांस्ड रहना होता है। इसके लिए बहत जरूरी है कि आप समय रहते अपना रिसर्च पूरा करें और लास्ट डेट्स के हिसाब से अपनी विदेशी पढ़ाई को प्लान करें। इससे आपको अतिरिक्त समय नहीं लगेगा और समय पर ही आपकी डिग्री पूरी होज ाएगी। इसके अलावा हर कोर्स का सिलेबस अलग होता है। आपको यह जानकारी पहले से ही रखनी होगी कि आपकी डिग्री के कितने सेमिस्टर्स हैं और इसमें कितना वक्त लगेगा।
Published on:
17 Aug 2018 01:05 pm
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